Tuesday, September 1st, 2026

गरुड़ पुराण का रहस्य: ये हैं 5 स्थितियां जब दाह संस्कार करना होता है वर्जित

सनातन धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन है. इन्हीं संस्कारों में से एक है दाह संस्कार. गुरुड़ पुराण में बताया गया है कि विधि और नियम से दाह संस्कार करने पर ही मृतक की आत्मा को शांति प्राप्त होती है. हालांकि शास्त्रों के अनुसार, सभी का दाह संस्कार जरूरी नहीं माना गया है. गरुड़ पुराण में खास श्रेणियों के लोगों के लिए दाह संस्कार के बजाय थल या जल समाधि का विधान भी है. साथ ही गरुड़ पुराण में इन पांच प्रकार के लोगों का दाह संस्कार करने से मना किया गया है. आइए जानते हैं.

गर्भवती महिला

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं की मृत्यु होने जाने पर उनका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. इसके पीछे की वजह व्यवहारिक और संवेदनशील है. दाह संस्कार के समय शरीर फटने की संभावना होती है. इससे गर्भ में पल रहा शिशु बाहर आ सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं की मृत्यु पर उन्हें थल या जल समाधि दी जाती है.

सांप के काटने मृत्यु होने पर

गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि अगर कोई व्यक्ति सांप के काटने या किसी जहर की वजह से मरता है, तो उसका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि विषैले प्रभाव की वजह से शरीर में सुक्ष्म प्राण करीब 21 दिनों तक उपस्थित रहते हैं. ऐसे व्यक्ति को पूरी तरह से मृत्यु को प्राप्त नहीं माना जाता. इसलिए ऐसे शव को जल समाधि देना सही रहता है.

11 साल से कम बच्चे

गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी बालक की मृत्यु 11 साल से कम उम्र में या गर्भ में हो जाती है, तो उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. माना जाता है कि छोटी आयु में आत्मा शरीर से मोहित कम होती है. बालक के जनेऊ संस्कार न होने और बालिका का मासिक धर्म शुरू न होने की स्थिति में मृत्यु होने पर उन्हें जल समाधि दी जाती है या उसमें बहाया जाता है.

संक्रामक बीमारी से मृत्यु पर

अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण कोई गंभीर संक्रामक बीमारी होती है, तो उनके शव का दाह संस्कार करना वर्जित माना गया है. इस नियम के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण है. अगर ऐसे किसी व्यक्ति का दाह संस्कार किया जाता है, तो हवा में संक्रामक फैल सकते हैं, जिससे अन्य लोगों को बीमारी हो सकती है, इसलिए ऐसे शव के लिए थल समाधि उचित मानी गई है.

साधु संत

गृहस्थ जीवन का त्याग और सन्यास ले चुके लोगों का भी दाह संस्कार वर्जित होता है. ऐसे इसलिए क्योंकि साधु संतों की इंद्रियां उनके वश में होती हैं. उनको शरीर से कोई मोह नहीं रह जाता. यही कारण है कि दिव्य पुरुषों को थल या जल समाधि दी जाती है.

 

#Garuda Purana

Source : Agency

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