प्रशिक्षण प्राप्त नियमित सेवारत चिकित्सकों को निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सोनोग्राफी करने की अनुमति निजी संस्थानों के लिए नहीं होही
भोपाल
निजी संस्थानों के एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों को छह माह के प्रशिक्षण के बाद सोनोग्राफी की अनुमति नहीं मिलेगी। यह व्यवस्था अभी मात्र सरकारी डाक्टरों के लिए है। निजी डाक्टरों के लिए भी इसका विस्तार करने का प्रस्ताव था, जिसे गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसीपीएनडीटी) के सुपरवाइजरी बोर्ड की बैठक में खारिज कर दिया गया है।
यह निर्णय भी लिया गया कि प्रशिक्षण प्राप्त नियमित सेवारत चिकित्सकों को निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सोनोग्राफी करने की अनुमति केवल शासकीय संस्थानों के लिए ही रहेगी। बैठक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी सोनोग्राफी मशीन लगाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी।
बैठक में राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सोनोग्राफी के दौरान महिला की जानकारी वाला एफ फार्म साफ्टवेयर में अपलोड नहीं करने पर केंद्र संचालकों का नवीनीकरण नहीं किया जाए। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के दंडात्मक प्रविधानों के बारे में सभी रेडियोलाजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तथा सोनोलाजिस्ट को अवगत कराने की व्यवस्था करें। प्रदेश में लिंग चयन गतिविधियों पर रोक के लिए मुखबिर योजना के संबंध जन-जागरूकता के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लिंग चयन की जानकारी देने वाले को नकद पुरस्कार दिया जाता है।
बायोमेट्रिक की जगह आइरिस स्कैन का विकल्प
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में पंजीकृत सोनोग्राफी संस्थानों की निगरानी जिला निरीक्षण एवं निगरानी समिति (डीएमआइसी) द्वारा अनिवार्य रूप से करने के लिए वैकल्पिक दल बनाए जाएं। वयोवृद्ध रेडियोलाजिस्ट /सोनोलाजिस्ट तथा ऐसे चिकित्सक, जिनके द्वारा फिंगर प्रिंट की आधार से पुष्टि के अभाव में फार्म-एफ अपलोड नहीं हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक बायोमेट्रिक के तौर पर आइरिस स्कैन का विकल्प पीसीपीएनडीटी पोर्टल पर दिया जाए।

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