मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ
वाराणसी
मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पोषण मेले में देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं और आहार विविधता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों के पोषण आहार का रंग-रूप और बनाने का तरीका भले ही अलग रहा, लेकिन सभी में पोषण के तत्वों को प्राथमिकता दी गई।
पोषण मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए। इनमें सात राज्यों के स्टॉल के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े स्टॉल भी शामिल रहे। अनुपूरक पुष्टाहार, ईसीसीई, सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित गतिविधियों को भी प्रदर्शित किया गया। मेले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की योजनाओं, पोषण आहार और नवाचारों की जानकारी साझा की।
एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों को जानने का अवसर
मिजोरम से आए जोयला ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को उनके यहां तैयार किए जाने वाले पोषण आहार और उसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्टॉल पर जाकर भी कई नई जानकारियां मिलीं। वहीं, उनके स्टॉल पर पहुंचे लोगों ने भी मिजोरम के पोषण संबंधी प्रयोगों और व्यंजनों के बारे में जानकारी ली।
राजस्थान से आईं एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने अपने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संचालित पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं काफी जागरूक हैं और पोषण आहार प्लांट का संचालन भी कर रही हैं। विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभागों की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्षय पात्र के माध्यम से स्कूली बच्चों को गर्म और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ के साथ साझेदारी तक
उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। सभी राज्यों के अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के बेहतर प्रयोगों को जाना और उन्हें अपने क्षेत्रों में अपनाने के लिए जानकारी हासिल की।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फास्ट फूड की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। ऐसे में मिजोरम के स्टॉल पर मिलेट्स से तैयार नूडल्स का प्रयोग काफी अच्छा लगा। वहीं, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ के साथ मिलकर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी मिली। इससे यह जानने का अवसर मिला कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए किस तरह संपर्क और सहयोग किया जा सकता है।नीतू पुलारा ने बताया कि उत्तराखंड से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कई नई बातें सीखीं। इस आयोजन को लेकर उनमें काफी उत्साह देखने को मिला।
मानदेय बढ़ने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार
वाराणसी और आसपास के जिलों से कार्यक्रम में पहुंचीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने पर योगी सरकार के प्रति आभार जताया।
गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने से उन्हें कई नई जानकारियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन जानकारियों को वे अपने कार्यक्षेत्र में अमल करने का प्रयास करेंगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वक्ताओं के संबोधन से कई नई बातें जानने को मिलीं। उन्होंने कहा कि अब इन बातों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडिशा,तमिलनाडु,गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका से संवाद किया।
तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने ‘वणक्कम’ से शुरू किया संवाद, जुड़वां बच्चों की देखभाल की सुनाई कहानी
कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर.रंजनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘वणक्कम’ कहकर संवाद शुरू किया। उन्होंने अपने कार्य का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक परिवार में 21 दिन के जुड़वां बच्चों की मां की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में उन्होंने परिवार के लोगों को समझाया और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से संभालने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी उनकी मदद की।
आर. रंजनी ने बताया कि दोनों बच्चे अब दो साल से आंगनवाड़ी केंद्र आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ और सामान्य रूप से बढ़ते हुए देखकर उन्हें काफी खुशी होती है। उनके इस अनुभव ने यह भी दिखाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका केवल पोषण आहार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे बच्चों और परिवारों को भावनात्मक एवं व्यक्तिगत सहयोग भी देती हैं।
मुख्यमंत्री ने ओडिशा से आईं सहायिका से कुपोषित बच्चों के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका के बारे में जानकारी ली। गोरखपुर के बसियापुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उनके गांव जा चुके हैं। इस पर कार्यकर्ता ने सहज अंदाज में मुख्यमंत्री से कहा कि आप मेरे घर भी आए हैं।

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