Sunday, August 23rd, 2026

बिहार में गंगा-गंडक का कहर! पटना से भागलपुर तक बाढ़ का खतरा, बगहा में कटाव से दहशत

 पटना
बिहार में गंगा नदी उफान पर है। पटना से भागलपुर तक गंगा में उफान से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। दियारा इलाके में पानी बढ़ जाने से लोग बाहर निकल रहे हैं तो गांधी घाट समेत कई घाटों को खतरनाक घोषित कर दिया गया है। उधर चंपारण में गंडक नदी तबाही का सबब बनती दिख रही है। बगहा शहर पर कटाव का खतरा मंडराने लगा है। सुल्तानगंज में गंगा नदी लाल निशान से काफी ऊपर बह रही है जिससे श्रावणी मेला पर संकट उत्पन्न हो गया है। बक्सर में रामरेखा घाट पर जलस्तर खतरनाक हो जाने से स्नान और जलबोझी करने वालों पर निरगानी रखी जा रही है।

राजधानी पटना में दियारा के निचले इलाके में पानी घुस गया है। जलस्तर लगातार बढ़ने से मनेर, दानापुर और बख्तियारपुर प्रखंड के दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। उधर, जलस्तर बढ़ने से शेरपुर-दिघवारा छहलेन पुल का निर्माण कार्य बंद करना पड़ा। एक दर्जन पिलर पानी में डूब गए हैं। कर्मियों ने मशीनें और निर्माण सामग्री हटा ली हैं।

मनेर के हल्दीछपरा से छितनवां तक जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा के दक्षिणी इलाके में हजारों एकड़ खेतों में पानी फैल चुका है। हालांकि उत्तरी दियारा को मनेर से जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर पानी नहीं चढ़ा है।गंगा किनारे पिकनिक स्पॉट न बनाने और बच्चों को पानी में खेलने रोकने की अपील की गई है।

दानापुर में पुरानी पानापुर के पास कटाव शुरू
दानापुर दियारा के निचले इलाके से गंगा का पानी प्रवेश करने लगा है। पांच पंचायत पुरानी पानापुर, कासिमचक, हेतनपुर, मानस और नवदियरी में सोता के जरिए गंगा का पानी दियारा में आने लगा है। इससे जहाज और नाव पकड़ने के लिए घाट पर आने-जाने में परेशानी होने लगी है। देवनिया नाला के गंगा खतरे के निशान से एक मीटर नीचे बह रही है।

पुनपुन: जलस्तर खतरे के निशान के करीब
झारखंड में लगातार बारिश से पुनपुन समेत क्षेत्र की अन्य नदियों पर दिखने लगा है। पुनपुन का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पुनपुन अब खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। वहीं, जहानाबाद से सटे धनरुआ क्षेत्र में कररुआ नदी के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

सुल्तानगंज में गंगा लाल निशान से ऊपर
भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहा है। इससे पूरे क्षेत्र में बाढ़ की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहां गंगा लाल निशान से 44 सेमी ऊपर यानी 34.94 मीटर के गंभीर स्तर पर बह रही है। इसके चलते सुल्तानगंज के विश्वप्रसिद्ध अजगैवीनाथ धाम घाट की सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं। गंगा के उफान के कारण जिले का पूरा दियारा क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। भागलपुर शहरी क्षेत्र के निचले हिस्से मानिक सरकार, आदमपुर, बूढ़ानाथ, कोयला घाट में बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है, जिससे लोग ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। कहलगांव, राघोपुर और इस्माईलपुर-बिंदटोली में भी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

मक्के और सब्जियों की फसलें डूबकर नष्ट
जलस्तर की बढ़ोतरी ने स्थानीय किसानों और पशुपालकों की कमर तोड़ दी है। दियारा में सैकड़ों एकड़ में लगी मक्के और मौसमी सब्जियों की फसलें पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो गई हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की गंभीर किल्लत हो गई है। चारे के इस संकट से पशुपालक बेहद परेशान हैं।

कहलगांव में पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने लगे
गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए बाढ़ प्रभावित होने वाले गांवों, गंगा तटवर्ती इलाकों और कटाव के मुहाने पर बसे गांवों में भय का माहौल है। पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने लगे हैं। तोफिल गांव के मुखिया प्रतिनिधि संजय मंडल ने बताया कि बहियार में हवा चलने पर धीमी गति से कटाव हो रहा है।

बगहा शहर के अस्तित्व को खतरा
गंडक नदी का कटाव अब बगहा शहर के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। शहर से सटे मंगलपुर के पास नदी की तेज धारा से कटावरोधी कार्य के छह बेडवार ध्वस्त हो गए हैं। यह बेडवार दो करोड़ रुपये की लागत से छह माह पहले बनाए गए गए थे। गंडक के कटाव का रुख देख नदी किनारे के बाशिंदे दहशत में हैं। ग्रामीण रातभर जागकर अपने घर और मोहल्ले की निगरानी कर रहे हैं।

बारिश का एक सीजन भी नहीं झेल पाया कटावरोधी कार्य
ग्रामीणों का कहना है कि कटावरोधी कार्य पर दो करोड़ रुपये खर्च किए गए है। लेकिन पहली बारिश में ही चार बेडवार ध्वस्त हो गए। दो बेडवार इधर एक-दो दिनों में धंस गये हैं।आरोप है कि पूर्व में भी कटावरोधी कार्य में बड़े बोल्डर की जगह छोटे-छोटे पत्थरों के टुकड़े लगाए गए थे। इससे नदी की तेज धारा के सामने यह बेडवार तिनके की तरह ध्वस्त हो गए हैं।

रातभर बच्चों के साथ जाग रहीं महिलाएं
गंडक के बढ़ते कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। महिलाएं छोटे बच्चों के साथ रातभर जाग रही हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव जारी रहा तो नदी उनके घरों और गांव को धारा में समेट सकती है। जेई शंभू सुमन ने बताया कि दिन-रात के शिफ्ट में काम किया जा रहा है। इससे नदी का रुख थोड़ा नरम पड़ा है।

चिऊरही में स्कूल व पैक्स गोदाम काट चुकी है नदी
बगहा के मधुबनी प्रखंड की चिऊरही पंचायत में भी गंडक नदी कटाव की चपेट में स्कूल और पैक्स गोदाम समेत कई संरचनाएं आ चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मजबूत कटावरोधी कार्य नहीं हुआ तो मंगलपुर समेत आसपास के इलाकों पर भी खतरा हो सकता है।

बक्सर में खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा
बक्सर में गंगा अब धीरे-धीरे खतरें के निशान की ओर बढ़ने लगी है। रामरेखा घाट सहित शहर के अन्य घाटों पर सुरक्षा घेरा तैयार कर दिया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति निर्धारित सीमा के आगे नहीं बढ़ सके। केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गंगा का जलस्तर 59.14 पहुंच गया है। गंगा का चेतावनी निशान 59.32 है जबकि खतरे का निशान 60.32 है। रामरेखा घाट पर पूजा-पाठ करने वालों पर पूरी निगरानी रखते हुए उन्हें सचेत किया जा रहा है। वहीं विवाह मंडप के निचला भाग पूरी तरह से डूब गया है। ऐसे में मांगलिक कार्य नहीं हो रहे हैं। सुरक्षा घेरा के पास लोगों को अलर्ट करने के लिये लाल झंडा लगाया जा रहा है

 

#Ganga

Source : Agency

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