कर्नाटक में कांग्रेस ने की भाजपा को चोट देने की तैयारी! लिंगायतों को लुभाने मठ पहुंचे राहुल गांधी
बेंगलुरु
पांच राज्यों में हार के बाद कांग्रेस कर्नाटक में अगले वर्ष होने वाले चुनाव पर अपना ध्यान लगाती नजर आ रही है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को श्री सिद्धगंगा मठ पहुंचे। राहुल के इस दौरे को लिंगायत समुदाय को लुभाने की ओर एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात है कि हाल के समय में लिंगायत समुदाय ने भारतीय जनता पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का मजबूती से समर्थन किया है।
श्री श्री शिवकुमार स्वामीजी की 115वीं जयंती पर मठ पहुंचे राहुल ने कहा, '12वीं सदी के समाज सुधारक बसवन्ना ने हमें सिखाया है कि हम एक हैं, हमें बगैर जाति, धर्म को देखें एक साथ रहना होगा और नफरत को दूर करना होगा।' उन्होंने कहा, 'जो भाईचारा आप यहां सिखाते हैं, वह आज पूरे देश के लिए जरूरी है।' कांग्रेस नेता ने बताया कि उनकी दादी, पिता और मां भी मठ आ चुके हैं।
खास बात है कि श्री सिद्धगंगा मठ का इतिहास 600 साल पुराना है और लिंगायत समुदाय के लिए यह सबसे पवित्र मठों में से एक है। यहां पहले भी पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों की मौजूदगी देखी जा चुकी है। खास बात है कि सियासी दलों और उनके नेताओं तक पहुंच के लिए भी इस मठ की तरफ से मिले आशिर्वाद को भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिकांश चुनाव से पहले नेता यहां पहुंचते हैं। भले ही पारंपरिक रूप से मठ सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके कामकाज को जानने वाले बताते हैं कि इनमें से कुछ की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
कांग्रेस और लिंगायत
साल 2018 विधानसभा चुनाव से बमुश्किल तीन महीने पहले ही तत्कालीन सिद्धारमैया सरकार ने समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दिया था। तब कांग्रेस लिंगायत समुदाय का समर्थन हासिल करने में असफल रही थी। माना जाता है कि कुल आबादी में लिंगायतों की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। उस दौरान कांग्रेस के इस फैसले को भाजपा ने 'हिंदू वोटर बेस' तोड़ने की कोशिश के रूप में दिखाया था। वहीं, कांग्रेस को 'वीरशैव' रखने के फैसले की कीमत सीटें गंवाकर चुकानी पड़ी थी। 2018 में कांग्रेस की सीटें 79 हो गईं थी। जबकि, 2013 में यह आंकड़ा 123 पर था। इसके चलते पार्टी को जनता दल (सेक्युलर) के साथ कम समय की सरकार बनानी पड़ी थी। खास बात है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां यह जानती हैं कि लिंगायत समुदाय राज्य के कई क्षेत्रों में चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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