Wednesday, October 21st, 2026

सरकारी सहायता से बहादुर सिंह ने कृषि की लागत घटाकर दोगुनी की आय

भोपाल

सफलता की कहानी

दमोह जिले के ग्राम टिकरिया अमखिरिया निवासी बहादुर सिंह लोधी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहते हैं कि इनकी योजनाओं से आज खेती वाकई लाभ का धंधा बन गई है। जैविक खेती से खाद, कीटनाशक आदि की लागत लगभग शून्य और आय दोगुनी हो गई है।

बहादुर सिंह कहते हैं कि जबसे उन्होंने कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्र के मार्गदर्शन में खेती करना शुरू की, तो जीवन के सपने भी पूरे होने लगे हैं। "बगीचे के मुनाफे से मैंने अपने लिये स्कूटर, पत्नी के लिये जेवर, एलसीडी खरीदने के साथ ही बेटी की शादी भी कर दी है। मुझको किसी से कोई कर्जा नहीं लेना पड़ा।'' उन्होंने किसानों से गुजारिश की कि वे भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठायें और अपना जीवन-स्तर बेहतर करें।

बहादुर सिंह कहते हैं चार साल पहले वे 5 बोरी डीएपी और 3 बोरी यूरिया का उपयोग करते थे। लागत बढ़ने के साथ इसका जमीन की उर्वरता पर भी दुष्प्रभाव पड़ता था। जैविक खेती में गोबर की खाद में बरसात के दिनों में केंचुए छोड़े थे, जिनसे अब बेहतरीन खाद बन चुकी है। जीरो बजट की इस खाद से पैदावार उत्तम किस्म की मिल रही है। लगभग 2 माह में तैयार केंचुए की खाद से 3 वर्ष तक उत्पादन मिलता रहता है। खेत और घर पर 2 बैल, 2 भैंस और 2 गाय हैं, जिनसे मिले गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खाद और जैविक कीटनाशक बनाकर कर रहा हूँ।

बहादुर सिंह ने बताया कि रोजगार गारंटी योजना में उन्होंने खेत में वर्ष 2017 में फलों का बगीचा लगवाया था। एक एकड़ के बगीचे में लगभग 100 नींबू, 50 अनार, 25 आम, एपल बेर, इलाहाबादी अमरूद, चीकू, संतरा, मोसंबी आदि के 5-5 पेड़ लगे हुए हैं।

बहादुर सिंह इस साल लगभग 35 हजार रुपये का अनार, 40 हजार रुपये का नींबू बेच चुके हैं। उन्होंने 125 रुपये के मान से नींबू का रस और 20 रुपये किलो की हिसाब से छिलका कृषि विज्ञान केन्द्र को बेचा है। इसके अलावा वे 200 रुपये किलो की दर से केन्द्र को नींबू का अचार भी बेच रहे हैं। बगीचे की खाली जगह में अदरक, हल्दी, धनिया आदि लगाकर अतिरिक्त आय ले रहे हैं।

जीरो बजट खेती के अनुसरण से क्षेत्र के किसान काफी प्रोत्साहित हैं। किसान एक तरफ फसल उद्यान, तो दूसरी तरफ चना, गेहूँ उगा रहे हैं। पहले किसान 8-10 हजार रुपये प्रति एकड़ में दवाइयों और रासायनिक खाद का उपयोग करते थे। यह खर्च अब शून्य हो गया है। जैविक कीटनाशक और खाद के उपयोग से फसलों में कीड़े, रोग आदि व्याधियाँ भी नजर नहीं आ रही हैं।

 

 

#सरकारी सहायता से

Source : Agency

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