Sunday, October 18th, 2026

छत्तीसगढ़ में बाढ़ का कहर: 300 से ज्यादा गांव बने टापू, रेल-सड़क और हवाई सेवाएं प्रभावित

जगदलपुर

बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब के प्रभाव से पिछले तीन दिनों से बस्तर संभाग में त्राहि-त्राहि मच गई है। इंद्रावती, शबरी सहित सभी नदियां उफान पर हैं और खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पड़ोसी राज्य ओडिशा में इंद्रावती नदी स्थित खातीगुड़ा और इसकी सहायक नदी मुरान के बांध के गेट खोलने से स्थिति बिगड़ गई है।

तीन सौ से अधिक गांव बाढ़ से घिरकर टापू बन गए हैं। नगरनार क्षेत्र के भेजापदर, तोकापाल के घाट धनोरा आदि एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को एसडीआरएफ की टीम द्वारा रेस्क्यू कर सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में भेजा गया है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार सौ से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

रेल, सड़क और हवाई यातायात बुरी तरह ठप

राष्ट्रीय राजमार्ग-30 रायपुर-कोटा और राष्ट्रीय राजमार्ग-63 जगदलपुर-बीजापुर-भोपालपटनम कई जगहों पर बाधित हो गया है। किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन कोरापुट रेलखंड में चार जगहों पर भू-स्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है।

इससे ट्रेनें बंद हो गई हैं। सड़क परिवहन पहले से ही बाधित है। हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर फ्लाइट दो दिनों से बंद है। रेलमार्ग बहाल होने में तीन से चार दिन का समय लग सकता है। सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।

50 से अधिक राहत शिविर, संभाग के सभी जिलों में छुट्टी घोषित

बाढ़ आपदा को देखते हुए संभाग के सभी सातों जिलों में शुक्रवार को छुट्टी कर दी गई। दक्षिण में कोंटा नगर से लेकर यहां जगदलपुर में निचली बस्तियों में पानी भरने से कई मकान डूब गए हैं। सभी जिलों में प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है।

संभाग में 50 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं। सर्वाधिक नुकसान सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिले में देखा जा रहा है। सांसद महेश कश्यप बाढ़ प्रभावित टापू बने गांव भेजापदर अधिकारियों के साथ स्वयं मोटरबोट से पहुंचे थे।

 

 

#services disrupted

Source : Agency

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