Friday, September 4th, 2026

PNB करेंसी चेस्ट में ₹17 करोड़ के नकली नोट! NIA ने संभाली जांच, बैंकिंग सिस्टम पर बड़े सवाल

सहारनपुर
यूपी के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में करोड़ों के नकली नोट मिलने के मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की आठ सदस्यीय टीम ने जांच की कमान संभाल ली है। टीम बुधवार रात सहारनपुर पहुंची और इसके बाद से मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और नकली नोटों के करेंसी चेस्ट तक नोट पहुंचने के रास्ते की पड़ताल शुरू कर दी है।

पीएनबी की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में नोटों की जांच के दौरान 17 करोड़ से अधिक की नकली करेंसी मिलने का मामला सामने आया है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलने के बाद बैंक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए गंभीर सवाल बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम के नकली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक आखिर किस माध्यम से पहुंचे।

सीधे करेंसी चेस्ट पहुंचे या किसी बैंक से?
एनआइए टीम नकली करेंसी के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि नकली नोट सीधे किसी माध्यम से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे या किसी बैंक शाखा या अन्य स्तर से होते हुए यहां तक आए। जांच के दौरान नोटों के करेंसी चेस्ट में आने की पूरी प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही कैश के आवागमन, नोटों की गिनती और जांच प्रक्रिया तथा संबंधित रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

बैंक के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल
एनआईए टीम बैंक में नकदी के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों की नजर उन प्रक्रियाओं पर है, जिनके तहत करेंसी चेस्ट में नकदी जमा होती है और उसकी जांच की जाती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली नोटों की पहचान बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान पहले क्यों नहीं हो सकी और वे किस स्तर पर करेंसी चेस्ट तक पहुंच गए।

कहीं संगठित नेटवर्क से तो नहीं जुड़े तार?
पीएनबी करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ से अधिक की नकली करेंसी मिलने का मामला महज नकली नोट बरामद होने तक सीमित नहीं दिख रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे? क्या यह किसी बैंक शाखा से सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के तहत यहां पहुंची या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित और संगठित नेटवर्क सक्रिय था? सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की नकली करेंसी बैंकिंग सिस्टम की इतनी महत्वपूर्ण कड़ी तक पहुंच गई और इसकी भनक समय रहते क्यों नहीं लगी।

माध्यम ही है जांच का अहम बिंदु
जांच का अहम बिंदु यह है कि नकली नोट किन माध्यमों से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। एजेंसियां इस संभावना को भी खंगाल रही हैं कि कहीं नकली करेंसी किसी संगठित गिरोह के जरिए अलग-अलग स्तरों से होते हुए बैंक तक तो नहीं पहुंचाई गई। यदि जांच में नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो मामला केवल बैंकिंग अनियमितता नहीं, बल्कि बड़े नकली करेंसी सिंडिकेट तक पहुंच सकता है।

बैंक अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में
करेंसी चेस्ट में नकदी पहुंचने, उसकी गिनती और जांच की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि नकली नोट किस स्तर पर सिस्टम में शामिल हुए और उनकी पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी। फिलहाल एनआइए की आठ सदस्यीय टीम मामले की जांच में जुटी है। टीम बुधवार रात सहारनपुर पहुंची थी। बैंक के रिकॉर्ड, कैश मूवमेंट और अन्य दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

निलंबित प्रबंधक फरार, गिरफ्तारी को कई राज्यों में दबिश
पंजाब नेशनल बैंक की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में सामने आए जाली नोट और नकदी गायब होने के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। नामजद और निलंबित बैंक अधिकारियों के खिलाफ सर्च वारंट जारी होने के बाद

अब उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
पुलिस के अनुसार करेंसी चेस्ट प्रकरण में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। इनमें एक मुकदमा जाली नोट मिलने से संबंधित है, जबकि दूसरे में करीब 4.30 लाख रुपये गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई है। पीएनबी के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की तहरीर पर कोतवाली सदर बाजार में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और खेरा बाजार जगाधरी करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद बैंक प्रबंधन ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इनमें रवि कुमार कांसे, सुशील शर्मा और अमित कुमार शामिल हैं। अब उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज है।

 

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Source : Agency

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