भुतहा शहर में तब्दील हुआ अफगानिस्तान का पंजशीर, गांवों में बचे सिर्फ बूढ़े और जानवर
काबुल
पंजशीर प्रांत अब भुतहा शहर जैसा लगने लगा है। चारों ओर मातमी सन्नाटा पसरा है। यहां के अधिकांश लोग अन्य शहरों की ओर पलायन कर गए हैं। इनमें से अधिकतर तो अपना डेरा काबुल में जमा लिए हैं। पंजशीर प्रांत के गांव में अब ज्यादातर बूढ़े और पशुधन ही बचे हैं। दुकानें बंद हैं और प्रांत का अधिकांश इलाका तालिबान के नियंत्रण में हैं। तालिबान नहीं चाहता कि लोग यहां से दूसरी जगह जाएं।
अब घाटी में स्वतंत्र महसूस नहीं कर रहे हैं, क्योंकि तालिबान गांवों में घुस गए हैं। घाटी में सभी मानवीय सहायता बंद कर दी गई थी, जिससे निवासियों के पास भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। एक पूर्व सरकारी कर्मचारी ने बताया कि गांव एक-दूसरे से इस तरह कटे हुए थे कि उन्हें पता नहीं था कि अगले गांव में क्या हो रहा है। उधर, पंजशीर के नेताओं ने दावा किया कि संघर्ष अब भी जारी है, लेकिन तालिबान ने दावा किया कि विरोधियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वे हमारा विरोध नहीं कर सके।
पंजशीर अफगानिस्तान का एक मात्र प्रांत है, जिस पर तालिबान पूरी तरह से कब्जा नहीं कर पाया है। हालांकि नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स(एनआरएफ) ने ऐसा दावा किया है। उसने दावा किया कि लड़ाई अब भी जारी है और अहमद मसूद भी वाशिंगटन में एक पैरवीकार के माध्यम से अमेरिका से मदद मांग रहा है, जबकि मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अहमद मसूद और अमरुल्लाह सालेह अब भी पंजशीर घाटी में हैं।

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