चाइल्ड बजट के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करे सरकार
(अमिताभ पाण्डेय )
भोपाल, अपनी खबर
राज्य सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2022 ~ 23 में बच्चों के लिए चाइल्ड बजट लाएगी । मध्यप्रदेश में पहली बार हो रहे इस प्रयास को बच्चों की बेहतरी के लिए प्रशंसनीय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर इस संबंध में कार्यवाही शुरू हो गई है।
चाइल्ड बजट में नया क्या होगा ? इससे बच्चों को क्या विशेष लाभ होगा ?
तय समय अवधि में चाइल्ड बजट की पूरी राशि कैसे खर्च होगी? ऐसे अनेक सवाल हैं , जो चाइल्ड बजट के साथ जुड़े हैं ।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में महिला बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा ,स्वास्थ्य ,पंचायत, पिछड़ा वर्ग , अनुसूचित जाति जनजाति, आदिम जाति कल्याण जैसे अनेक विभागों के माध्यम से बच्चों के कल्याण की अनेक योजनाओं का संचालन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है ।
इन सभी विभागों के लिए हर साल जो बजट तैयार होता है, उसमें एक तिहाई उससे ज्यादा राशि बच्चों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर ही खर्च होती है । महिला बाल विकास , स्कूल शिक्षा जैसे विभागों का अधिकतम बजट बच्चों से जुड़ी योजनाओं पर ही व्यय होता है।
इन योजनाओं में कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम ,मध्यान्ह भोजन योजना, आंगनवाड़ी, लाडली लक्ष्मी योजना, छात्रवृत्ति योजना, गणवेश वितरण ,पुस्तक वितरण ,छात्रावास, बच्चों के स्वास्थ, सुरक्षा , जागरूकता के लिए चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं। वर्तमान में भी इन सभी योजनाओं पर हर साल अलग-अलग विभागों के माध्यम से लगातार काम हो रहा है। अभी बच्चों की योजनाएं अलग अलग विभाग संचालित कर रहे हैं । अब हर विभाग को बच्चों से संबंधित योजनाओं पर व्यय होने वाली राशि को अलग से बताना होगा ।ऐसा माना जा रहा है कि राज्य शासन के विभिन्न विभागों की बच्चों से जुड़ी सभी योजनाओं और उन पर व्यय होने वाली राशि को मिलाकर चाइल्ड बजट में शामिल कर दिया जाएगा ।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड बजट में कुछ नए प्रावधान भी किए जा सकते है। बच्चों पर केंद्रित चाइल्ड बजट के बाद मध्यप्रदेश में बच्चों की स्थिति में कितना बदलाव आएगा ? बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा ,सुरक्षा की स्थिति कितनी बेहतर होगी ? यह देखना दिलचस्प होगा ।बाल अधिकार के लिए काम करने वाली एक सामाजिक संस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चाइल्ड बजट बनाते हुए यह भी ध्यान देना होगा कि बच्चों के हितों से जुड़ी योजनाओं का बजट पिछले वर्षों में आवंटित राशि से कम नहीं होने पाए ।इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चाइल्ड बजट की राशि तय समय अवधि में ही पूरी व्यय हो जाए ।
इसके लिए वर्ष भर की कार्ययोजना बनाकर जिम्मेदारी भी तय करना होगी ।
यहां यह बताना जरूरी होगा कि वर्तमान में बच्चों के लिए बजट में अलग-अलग विभागों में जितनी राशि का प्रावधान किया जा रहा है ,वह पूरी की पूरी राशि तय समय अवधि में खर्च नहीं हो पाती है।
इस सिलसिले में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उदाहरण देना जरूरी होगा ।
मध्यप्रदेश में सरकार बेटियों के महत्व को बताने और बढ़ाने के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रही है ।राज्य शासन ने एक आदेश जारी कर ऐसा प्रावधान भी किया है कि हर महत्वपूर्ण शासकीय आयोजन का शुभारंभ बालिका पूजन से किया जाए। ऐसा हो भी रहा है।मुख्यमंत्री भी जहां जाते हैं वहां बेटियों की पूजा जरूर करते हैं।
इसके बाद भी मध्य प्रदेश में सरकार बेटियों के नाम पर केंद्र सरकार से बजट में मिली पूरी राशि पिछले 3 साल से खर्च नहीं कर पा रही है । अधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 ~19 से वर्ष 2020 ~ 21 तक मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार से बेटी पढ़ाओ , बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत कुल 3 हजार 397 करोड रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई । इस राशि में से 3 साल में केवल 1हजार 218 करोड रुपए ही खर्च हो सके । इसका मतलब यह यह है कि पिछले 3 साल में केवल 35% राशि ही राज्य सरकार खर्च कर पाई।
बाकी राशि का तय समय में उपयोग नहीं हो सका। यह केवल एक योजना में भारत सरकार से प्राप्त राशि और उसमें हुए खर्च का हिसाब है । यदि हम मध्य प्रदेश शासन के अलग-अलग विभागों में बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर खर्च हुई राशि का आकलन करें , तो पता चलेगा कि अनेक विभागों में बच्चों के लिए तय समय अवधि में पूरी राशि खर्च नहीं हो पाई है ।चाइल्ड बजट में इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि जितनी राशि स्वीकृत की जा रही है वह पूरी की पूरी राशि बच्चों के हक अधिकार के लिए निर्धारित समयावधि में खर्च हो सके। इसके लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था भी करना होगी , तभी चाइल्ड बजट के बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

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