Friday, October 23rd, 2026

कोरोना के डर से 50 प्रतिशत कैंसर मरीजों ने बीच में छोड़ा इलाज

लखनऊ
कोरोना का भय कैंसर मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। 50 प्रतिशत कैंसर मरीजों का इलाज अधूरा रह गया है। कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी की तारीख पर मरीज नहीं आ रहे हैं। ऑपरेशन की तारीख मिलने के बाद भी मरीज अस्पताल आने में घबरा रहे हैं। डॉक्टर फोन कर मरीजों को ऑपरेशन के लिए बुला रहे हैं। इसके बावजूद मरीज अस्पताल तक आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कैंसर मरीजों का इलाज तीन विधियों से होता है। पहला दवाओं से। इसे मेडिकल आंकोलॉजी कहते हैं। दूसरा रेडियोथेरेपी से। इसमें मरीज के कैंसर वाले अंग की सिकाई की जा जाती है। तीसरा ऑपरेशन कर कैंसर वाले हिस्से को हटाया जाता है। कई मरीजों को दो या फिर तीनों विधियों से इलाज मुहैया कराया जाता है। लखनऊ में केजीएमयू, लोहिया संस्थान, पीजीआई और कैंसर संस्थान में रेडियोथेरेपी की सुविधा है।

केजीएमयू में सामान्य दिनों में रोजाना 225 मरीजों की रेडियोथेरेपी होती थी। कोरोना संक्रमण व कर्फ्यू की वजह से मरीजों की संख्या सिमटकर 100 से 110 पहुंच गई है। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक डेंटल, गेस्ट्रो, न्यूरो, यूरोलॉजी, ईएनटी समेत दूसरे विभागों में रोजाना 30 से 35 मरीजों की कीमोथेरेपी होती थी जो घटकर 15 से 20 पर आ गई है।

लोहिया संस्थान के प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह के मुताबिक 174 मरीजों की रेडियोथेरेपी होती थी। यह घटकर 70 से 80 के बीच रह गई है। कीमोथेरेपी व ऑपरेशन की संख्या में भी 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। चक गंजरिया स्थित कैंसर संस्थान को कोविड हॉस्पिटल में तब्दील किया गया है। यहां गिने-चुने मरीजों की रेडियोथेरेपी हो रही है। पीजीआई में भी कैंसर मरीजों की सिकाई 50 प्रतिशत से कम हो गई है।

 

#कोरोना

Source : Agency

पाठको की राय