भोपाल से सटे वन्य क्षेत्रों में बाघों की दहाड़ से दहशत में मजदूर और राहगीर
भोपाल
भोपाल के नजदीक वन्य क्षेत्रों में बाघों की दहाड़ से आए दिन वनकर्मी, मजदूर और राहगीर दहशत में जी रहे हैं। यह स्थिति कलियासोत, मेंडोरा, केरवा चौकी, चंदनपुरा क्षेत्रों में बन रही है। इन क्षेत्रों में वाकई बाघों की मौजूदगी है, जिनकी दहाड़ आए दिन इन क्षेत्रों से गुजरने वाले राहगीर, इन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर और वनकर्मियों को सुनाई देती है। बाघों की दहाड़ से वनकर्मी और मजदूर तो अभ्यस्त हो गए हैं, लेकिन कई बार दहाड़ों को सुनकर राहगीर असहज हो जाते हैं और यह मान लेते हैं कि बाघ जंगल से बाहर निकल आए हैं। यहीं से मुश्किल बढ़ जाती है।
दरअसल, 13 शटर गेट से जागरण लेकसिटी की तरफ जाने वाले क्षेत्रों में बाघों की दहाड़ सुनकर सोमवार को कुछ राहगीरों ने वन विभाग को खबर दे दी कि बाघ बाहर निकल आए हैं। इस पर वन विभाग अलर्ट हो गया। मौके पर पूरा अमला भेजा गया। सर्चिंग शुरू कराई गई। करीब चार घंटे तक पूरे क्षेत्र में सर्चिंग चली। शाम पांच बजे वन विभाग के अधिकारियों ने समीक्षा की तो पाया कि बाघ बाहर नहीं निकले हैं, बल्कि अंदर ही कवर्ड एरिया में मूवमेंट है, जहां कि रोजाना रहता है। इसके बाद सर्चिंग बंद कर दी गई और सूचना देने वालों को दूरभाष पर बता दिया कि अगली बार से भय रखने की जरूरत नहीं है क्योंकि बाघों का मूवमेंट कवर्ड क्षेत्र में ही है और कोई भी बाघ बाहर नहीं निकला है। यह स्थिति आए दिन बन रही है जो वन विभाग के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।
भोपाल के केरवा, कलियासोत, मेंडोरा, बुलमदर फार्म, संस्कार वैली स्कूल के आसपास के क्षेत्रों में बाघों को मूवमेंट हमेशा से रहा है। वन विभाग के समरधा रेंजर शिवपाल पिपलदे ने बताया कि दो से तीन बाघों का स्थाई मूवमेंट रहा है, जिस पर वन अमला चौबीस घंटे नजर रखे हुए हैं। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं छोड़ रहे हैं। आम लोगो, राहगीरों, मजदूरों को भी लगातार सलाह दी जा रही है कि शाम होने के बाद क्षेत्रों में बिल्कुल प्रवेश न करें। आवागमन के लिए दूसरे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। दहाड़ सुनकर न डरें। खासकर सैंकड़ों की संख्या में युवा दिन में जंगल के अंदर तक प्रवेश करने की कोशिशें करते हैं, उन्हें भी समझाइश दी जा रही है कि बाघ मूवमेंट वाला इलाका है, इसलिए अंदर प्रवेश न करें।

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