मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिये प्रति मंगलवार और शुक्रवार को टीकाकरण अभियान जारी
मुरैना
चंबल संभाग के तीनों जिलों में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिये नये प्रसव केन्द्रों को संचालित करने के लिये शासन की अनुमति मांगी गई है। जिले में शासन की ओर से शीघ्र ही प्रस्ताव पास होने पर श्योपुर जिले के पृथ्वीपुरा, पहेला, बुढ़ेरा, गिरधपुर, ओछापुरा एवं गसवानी में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित किये जायेंगे, जिससे गर्भवती महिलाओं को अपने गांव के निकट ही डिलीवरी प्वाइंट पर प्रसव की सुविधा उपलब्ध हो सके। जिन गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है, वहां पर उनको उप स्वास्थ्य केन्द्र कम्यूनिटी हेल्थ ऑफीसर के द्वारा आयरन सुक्रोज चढ़ाने की व्यवस्था भी की जा रही है। अधिकांश कम्यूनिटी हेल्थ ऑफीसर को प्रशिक्षण दिया जाकर यह कार्य चंबल संभाग के तीनों जिलों में किया जा रहा है।
संयुक्त आयुक्त विकासराजेन्द्र सिंह ने बताया कि कराहल विकासखण्ड के साथ-साथ विजयपुर विकासखण्ड में कैम्प स्तर पर अंकुश लगाने के काम किये जा रहे है, जिससे अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं को खून की कमी की समस्या से छुटकारा पाया जा सके। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक आने-जाने के लिये एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध हो। इसकी ओर से 4 नवीन एम्बुलेंस गाड़ियां 11 विकासखण्डों एवं जिला मुख्यालय को भी प्रदान की गई है। गर्भवती महिलाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिये उप स्वास्थ्य केन्द्रों तक सीएचओ को पदस्थ किया जाकर जिले में कुल 64 कम्यूनिटी हेल्थ ऑफीसरों को पदस्थ किया जा चुका है, ताकि ग्रामीण स्तर तक उच्च स्तर की सुविधायें प्रदान की जा सके। प्रति शुक्रवार को जिला स्तर से स्त्री रोग विशेषज्ञों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भेजा जाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं को जो कि उच्च जोखिम वाली होती हैं, उनको जिला अस्पताल तक न आना पड़े। स्वस्थ्य एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी उनका उपचार हो सके। इसी कड़ी में जिला चिकित्सालय में ही केवल रक्त चढ़ाने की व्यवस्था होने से विजयपुर विकासखण्ड की कई महिलाओं को परेशानी होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिये विजयपुर विकासखण्ड में ब्लड स्टोरेज यूनिट संचालित की गई है, जिससे विजयपुर विकासखण्ड की गरीब एवं हाइट्स गर्भवती महिलाओं को वहीं पर खून चढ़ाया जा सके।
उन्होंने बताया कि भिण्ड जिले में समस्त गर्भवती महिलाओं का प्रथम त्रैमास में पंजीयन सुनिश्चित करने के लिये विकासखंड स्तरीय बैठकें आयोजित कर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की उपस्वास्थ्य केन्द्र बार समीक्षा की जाकर पंजीयन बढ़ाने के समुचित प्रयास किये गये है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक गर्भवती महिलाओं की न्यूनतम 4 एएनसी जांचे सुनिश्चित किये जाने के प्रयास किये जा रहे है। चार एएनसी जांचों में एक जांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सीओ एवं एन जांच सेक्टर मेडीकल ऑफीसर द्वारा जांच की जा रही है। 1 अप्रैल से अभी तक 688 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिहिंत किया जाकर उनका उपचार एवं फॉलोअप निरंतर किया जा रहा है। प्रत्येक सोमवार और गुरूवार को ग्राम स्तर पर एएनसी क्लीनिक का आयोजन किया जा रहा है। स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के समन्वय से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल की जा रही है।

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