Wednesday, August 19th, 2026

JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने पर मचा घमासान, नौकरी बचाने हाई कोर्ट जाएंगे अभ्यर्थी

रांची
 जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद करने की घोषणा के बाद कानूनी पहलू पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर नौकरी से हटाए जाने वाले कर्मियों का क्या होगा। इस पर हाई कोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि सरकार का निर्णय पूरी तरह से एकपक्षीय है।

सरकार ने बिना किसी निष्पक्ष जांच और नौकरी करने वाले अभ्यर्थियों को सुनवाई मौका दिए बिना ही ऐसा निर्णय लिया है, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। सरकार ने कोर्ट के आदेश पर इनकी नियुक्ति की था और सरकार ही उन्हें हटाने का निर्णय लिया है।

ऐसा करना उनके साथ अन्याय है। क्योंकि इनकी नियुक्ति मेरिट के आधार पर हुई है। कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकालना जाना उचित नहीं है, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

सरकार के निर्णय के खिलाफ दाखिल करेंगे याचिका
सरकार की घोषणा के बाद जिनकी नौकरी चली गई है, वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रहे हैं। इस केस से संबंधित अधिवक्ता का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से इससे संबंधित कोई आदेश या संकल्प जारी नहीं किया जाता है, तब तक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की जा सकती है।

क्योंकि सरकार की ओर से जारी आदेश या संकल्प में सीजीएल परीक्षा रद करने का आधार बताया जाएगा। जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सरकार के निर्णय से प्रभावित अभ्यर्थियों ने अधिवक्ताओं से संपर्क स्थापित करना प्रारंभ कर दिया है।

उनका कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सीजीएल परीक्षा का परिणाम जारी करते हुए उनकी नियुक्ति सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर हुई थी। ऐसे में यह एक तरह से कोर्ट के अवमानना का भी मामला बनता है।

सरकार का निर्णय उत्साहवर्धक: अजीत कुमार
जेएसएससी सीजीएल में पेपर लीक होने का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पैरवी करने वाले वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा कि सरकार का निर्णय उत्साहवर्धक है। इस मामले में हो रही जांच में सारे साक्ष्य उपलब्ध थे।

 

 

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Source : Agency

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