Tuesday, October 20th, 2026

UP चुनाव: लाभार्थी वर्ग किसे पहुंचाएगा लाभ? किसी भी समुदाय से ज्यादा आबादी

 नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश में जाट और मुस्लिम समीकरण और अगड़ा बनाम पिछड़ा जैसे समीकरणों पर खूब बात हो रही है। क्षेत्रीय और जाति आधारित दलों से बड़ी पार्टियों ने गठबंधन भी किए हैं और इसके नफा-नुकसान का आकलन राजनीतिक विश्लेषक करने में जुटे हैं। लेकिन सूबे की राजनीति में एक ऐसा वर्ग भी तैयार हुआ है, जो ऐसे तमाम समीकरणों की चर्चा से परे है और आबादी में सबसे ज्यादा है। यह वर्ग लाभार्थियों का है, जिन्हें केंद्र से लेकर यूपी की योगी सरकार तक से तमाम फायदे पहुंचे हैं और वे अपनी जाति या धर्म से परे हटकर भी सरकार को वोट दे सकते हैं। यदि ऐसा लाभार्थी वर्ग इस बार सत्ता के खेल को बनाने या बिगाड़ने का काम करता है तो आने वाले चुनावों में यह भी एक बड़े ब्लॉक में शामिल हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोरोना काल में योगी सरकार ने मुफ्त राशन बांटा है। भले ही कोरोना की दूसरी लहर का कहर लोगों के जेहन में है, लेकिन मुफ्त राशन की स्कीम उस बड़े वर्ग के लिए अहम साबित हुई है, जो गरीब तबके में शामिल है। इसके अलावा राज्य में डेढ़ करोड़ परिवार ऐसे हैं, जिन तक केंद्र सरकार की ओर से उज्ज्वला स्कीम के तहत एलपीजी कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। यही नहीं मनरेगा स्कीम के जरिए कोरोना काल में बड़ी संख्या में यूपी में ग्रामीण इलाकों में लोगों को तात्कालिक रोजगार प्रदान किया गया था। इस तरह लाभार्थी योजनाओं का लोगों को बड़ी संख्या में फायदा पहुंचा है।
 

ऐसे में यह वर्ग यदि सरकार के पक्ष में जाता है तो यह उसके लिए बड़ी सफलता होगी। हालांकि यूपी की राजनीति को समझने वाले जानकार ऐसा तय नहीं मानते।  बातचीत में कहा, 'लाभार्थी वर्ग निश्चित तौर पर राज्य में प्रभावी है। लेकिन यह तय नहीं है कि इसका एकमुश्त वोट सत्ता चला रही भाजपा को ही मिलेगा। यह देखना होगा कि यूपी का लाभार्थी वर्ग जाति, समुदाय में कितना बंटता है या फिर लाभ के बदले वोट करता है।' उन्होंने कहा कि यदि हम इस प्रकार से सोचते हैं तो फिर छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजों पर भी फोकस करना चाहिए, जहां उज्ज्वला स्कीम के तहत लोगों को सबसे ज्यादा कनेक्शन मिले, लेकिन सरकार कांग्रेस की लोगों ने बना दी।

इन 33 लाख परिवारों से हैं भाजपा को उम्मीदें
भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद उन परिवारों से भी है, जिन्हें पीएम आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाकर दिए गए हैं। भाजपा सरकार का कहना है कि योगी सरकार के कार्यकाल में 33 लाख आवास बनाए गए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि सरकार 33 लाख परिवारों की ओर वोट के लिए उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। यदि आवास योजना के लाभार्थी ही भाजपा सरकार को समर्थन देते हैं तो यह स्कीम गेमचेंजर साबित हो सकती है। लेकिन सवाल यही है कि क्या लाभार्थी वर्ग क्षेत्र, जाति और समुदाय के आधार पर वोट नहीं करेगा?

 

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Source : Agency

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