Sunday, October 25th, 2026

धर्मांतरण के लिए उमर गौतम ने धर्मांतरण के लिए रिवर्ट पॉलिसी बनाई

नई दिल्ली
 धर्मांतरण पर आईडीसी इस्लामिक दवाह सेंटर के संस्थापक उमर गौतम ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया है. जानकारी के मुताबिक, उमर गौतम ने धर्मांतरण के लिए रिवर्ट पॉलिसी बनाई थी जिसमें ये कहा जाता था कि कोई भी इंसान इस्लाम धर्म मे पैदा लेता है, लेकिन किसी कारण से वो दूसरे धर्म मे चला जाता है. इसलिए रिवर्ट के जरिए उन्हें फिर से इस्लाम धर्म मे वापस लाना ही उसका काम है.
'दावत से इस्लाम' पॉलिसी का इस्तेमाल

पूछताछ में उमर गौतम ने बताया कि दावत से इस्लाम का मतलब ये है कि धर्मांतरण के लिए पहले गेट टू गेदर के जरिए मिलना और फिर इस्लाम की मोटिवेशनल स्पीच के जरिये लोगो का दिल जीतना. उमर गौतम ने बताया कि दावत का ये भी मतलब है कि लोगों का दिल जीत लो, ईश्वर एक ही है वो भी खुदा.

धर्मांतरण के लिए सबसे पहले गीता पढ़ाया जाता है, फिर कुरान पढ़ाते हैं फिर दोनों का अंतर बताया जाता है. फिर धर्मग्रंथ गीता के बारे में और इसकी कमियों को बताया जाता है. उसके बाद मुस्लिम ग्रंथ हदीस पढ़ाया जाता है.

हदीस पढ़ाने के बाद किसी व्यक्ति का ब्रेन वॉश हो जाता है और फिर धीरे धीरे उसे इस्लाम के प्रति आकर्षित कर लिया जाता है.
मूक-बधिरों को इसलिए बनाया जाता था टारगेट

धर्म परिवर्तन के लिए मूक-बधिर लोगों को टारगेट करने के पीछे मकसद ये होता था कि ये न तो बोल सकते है, न ही सुन सकते हैं. ये बस साइन लैंग्वेज समझते हैं, जबकि ज्यादातर लोग साइन लैंग्वेज नहीं समझते. किसी को इनके एजेंडे के बारे में शक न हो इसलिए ऐसे लोगों को चुना जाता है. वहीं मूक बधिर लोगों को लेकर इन्हें लगता है कि ये आसानी से इस्लाम धर्म के प्रति आ​कर्षित हो जाएंगे और धर्म परिवर्तन के लिए मान जाएंगे.

इन लोगों में उनके परिवार के प्रति भी नफरत पैदा की जाती है. इन्हें समझाया जाता है कि तुम मूक बधिर हो तुम्हारी शादी घरवाले नहीं करवाएंगे. कोई भी लड़की तुम से शादी नहीं करेगी, लेकिन अगर तुम इस्लाम कबूल करोगे, तो तुम्हारी शादी एक अच्छी लड़की से करवाएंगे.

इनसे ही भी कहा जाता है कि समाज में न तो कोई तुम्हें नौकरी देगा और न ही पैसे. हम तुम्हें पैसे भी देंगे ओर शादी भी करवा देंगे.

 

#धर्मांतरण

Source : Agency

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