लंग्स को बचाने के लिए ये विटामिन्स जरूर करें शामिल
कोरोनावायरस के साथ वायु प्रदूषण भी लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। हमारे श्वसन तंत्र में प्रवेश करने वाले छोटे -छोटे धूल के कण जलन और फेफड़ों से संबंधित कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं। जिससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए आप दवा तो लेते ही होंगे, लेकिन कुछ विटामिन्स भी हैं, जिनमें फेफड़ों को स्वस्थ्य बनाने की अच्छी खासी क्षमता है।
इतना ही नहीं सेल डैमेज को रोकने के लिए भी इन्हें लेना बहुत फायदेमंद है। अपने आहार में इन विटामिन्स का सेवन बढ़ा लिया , तो सांस फूलना और जलन जैसी समस्या से राहत पाई जा सकती है। तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको 3 ऐसे विटामिन्स बता रहे हैं, जिन्हें फेफड़ों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आपको जरूर लेना चाहिए।
विटामिन-ए का सेवन शुरू करें-
प्रदूषित धुएं और संक्रमण की वजह से फेफड़े कमजोर होने लगे हैं। इनकी क्षमता को बरकरार रखने के लिए जितना हो सके विटामिन - ए का सेवन करें। वसा में घुलनशील पोषक तत्व फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए दूसरा सबसे जरूरी महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह न केवल आपकी प्रतिरक्षा बढ़ाएगा बल्कि कुछ मात्रा में इसके सेवन से फेफड़ों के ऊतकों को रिपेयर करने में भी मदद मिलेगी।
अधिक मात्रा में विटामिन -ए लेने की जरूरत नहीं-
अच्छी बात ये है कि आपको बहुत ज्यादा मात्रा में विटामिन- ए लेने की जरूरत नहीं होती। वसा में घुल जाने के कारण यह पोषक तत्व शरीर में लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और शरीर को कम मात्रा में ही इसकी जरूरत होती है। डेयरी उत्पाद , मछली, खरबूजा, ब्रोकोली, गाजर आपके शरीर में विटामिन ए की कमी को पूरा करने के लिए काफी हैं। पर ध्यान रखें, लंबे समय तक इसका सेवन करने से आप भविष्य में लीवर और हड्डियों की समस्या का अनुभव कर सकते हैं।
आहार में विटामिन - सी शामिल करें
विटामिन - सी कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद है। आपके फेफड़ों को क्रॉनिक डिजीज से बचाना उनमें से एक है। एक दिन में इस विटामिन का पर्याप्त सेवन करने से यह प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के साथ त्वचा में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। दरअसल, धुम्रपान करने और प्रदूषण के कारण फेफड़ों में फ्री रेडिकल्स और विषाक्त पदार्थों की मौजूदगी शरीर में सूजन पैदा करती है। ऐसे में विटामिन- सी , जो ज्यादातर खट्टे फलों में पाया जाता है, मुक्त कणों और विषाक्तत पदार्थों से लडऩे के अलावा हानिकारक अणुओं से छुटकारा दिलाने में फायदेमंद है। इतना ही नहीं विटामिन- सी लंग्स टिशू डैमेज रेट को कम करता है, जिससे स्वास्थ्य बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
विटामिन- सी से होता है फेफड़ों की क्षमता में सुधार-
एलर्जी, अस्थमा और क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित 2014 के एक अध्ययन के अनुसार, विटामिन सी फेफड़ों के काम करने की क्षमता में सुधार करता है। बता दें, कि इस पोषक तत्व के फायदे खासतौर से इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण हैं। शरीर में इसकी कमी को पूरा करने के लिए खट्टा फल, अमरूद, कीवी, ब्रोकोली, केल और जामुन खाना चाहिए।
संक्रमण से बचाएगा विटामिन डी का सेवन
आप शायद नहीं जानते होंगे, लेकिन दांत और हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ विटामिन डी श्वसन संक्रमण से भी बचाता है। अगर किसी को क्रॉनिक ऑब्स्ट्रेक्टिव पल्मोनरी डिसीज है, तो विटामिन डी इसका बेहतरीन इलाज है। एक रिसर्च के अनुसार, शरीर में विटामिन डी की कमी से घरघराहट, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और अन्य श्वसन समस्याओं का जोखिम बढ़ता है।
ऐसे में इस पोषक तत्व को अपने आहार में शामिल करने से फेफड़ों के कामकाज में सुधार हो सकता है। वैसे तो कई लोग विटामिन डी की गोलियां लेते हैं, लेकिन सूर्य के प्रकाश से आपको अच्छी मात्रा में विटामिन डी प्राकृतिक तौर पर मिल जाता है। अगर ऐसा करना संभव नहीं है, तो कुछ खाद्य पदार्थ जैसे ट्यूना, सैल्मन और अंडे की जर्दी विटामिन डी की आपूर्ति करने के लिए बढिय़ा विकल्प हैं।
विटामिन-D की कमी से मर्दों को हो सकती है इनफर्टिलिटी की समस्या, किसी भी कीमत पर न करें नजरअंदाज
प्रदूषित हो रहे वातावरण और कोरोना के माहौल में फेफड़ों की देखरेख बहुत ज्यादा जरूरी है। ऊपर बताए गए विटामिन का प्राकृतिक रूप से सेवन करें। बहुत फायदा होगा।

पाठको की राय