Wednesday, October 21st, 2026

MP को इस बार 35 पुरस्कार, ग्वालियर को गार्बेज फ्री सिटी का अवॉर्ड

ग्वालियर
स्वच्छता सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ने एक बार फिर पूरे देश में सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल किया है। यह लगातार पांचवां साल है जब इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है। इस घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया- वाह भिया! छा गया अपना इंदौर...। प्रदेश ने इस बार कुल 35 पुरस्कार हासिल किए हैं। इसकी घोषणा राष्टÑपति रामनाथ कोविंद ने की।

स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर का एक बार फिर डंका बजा है। इंदौर 5वीं बार भी देशभर में अव्वल आया है। वर्ष 2017 से इंदौर देशभर में नंबर-1 पर आ रहा है। इस बार इंदौर ने सफाई का ‘पंच’ लगा दिया। सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज में भी इंदौर अव्वल रहा। इसमें 12 करोड़ रुपए का पुरस्कार मिला। वहीं भोपाल नंबर सात रहा है। मप्र के कई शहरों ने अच्छी रैंकिंग पाई है। मध्यप्रदेश को कुल 35 अवार्ड मिलेंगे। इंदौर के पांचवीं पर टॉप रहने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इंदौरी अंदाज दिखा। उन्होंने ट्वीट किया- वाह भिया! छा गया अपना इंदौर... दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में विजेता शहरों और प्रदेशों को सम्मानित किया जा रहा है। देश के सबसे साफ शहरों की श्रेणी में इंदौर की प्रबल दावेदारी मानी जा रही थी। हुआ भी वैसा ही। साल 2017 से इंदौर नंबर-1 पोजिशन पर है। लगातार पांचवीं बार उसे यह खिताब मिला है। राष्ट्रपति कोविंद ने नंबर-1 पर रहे इंदौर को अवार्ड दिया।

ग्वालियर इस बार 15 वें नंबर पर रहा है, यानी दो पायदान नीचे खिसक गया है। इससे शहरवासियों की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। अब शहर को गार्बेज फ्री सिटी के अवार्ड से ही संतोष करना पड़ेगा। खास बात यह है कि देश में इंदौर एक बार फिर स्वच्छता में टाप पर रहा है। पिछली बार स्वच्छता सर्वेक्षण में ग्वालियर 13 वें स्थान पर था, जबकि इस बार दो पायदान नीचे खिसक कर 15 वें स्थान पर चला गया है। इससे साफ है कि ग्वालियर में स्वच्छता को लेकर किए गए प्रयास नाकाफी थे। गौरतलब है कि इसके पहले वाटर प्लस का तमगा भी शहर के हाथ से फिसल चुका था, इसके बाद भी निगम ने सबक नहीं लिया।

 स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार पिछड़ने का मुख्य कारण यह है कि ग्वालियर में साल भर स्वच्छता को लेकर प्रयास नहीं किए जाते हैं। जब सर्वे शुरू होने वाला होता है, इसके पहले नगर निगम के अफसर शहर में सफाई कार्य पर फोकस करना शुरू करते हैं। ऐसे में टीम जब सर्वे के लिए आती है तो पूरी हकीकत सामने खुल जाती है। जबकि इंदौर एवं अन्य शहरों में साल भर सफाई पर फोकस करने के साथ ही लगातार नवाचार भी किया जाता है।  स्वच्छता के मामले में जरूर शहर पिछड़ गया है, लेकिन गार्बेज फ्री सिटी का अवार्ड शहर को प्राप्त होगा। कुल मिलाकर अब शहर को इसी से संतोष करना पड़ेगा।

स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 में प्रदेश को कुल 27 सम्मान मिले थे। इसमें 18 शहर स्टार रेटिंग और 9 शहर स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए थे। इस बार कुल 35 अवार्ड मिल रहे हैं। इनमें से 21 अवार्ड विज्ञान भवन में चल रहे राष्ट्रीय कार्यक्रम में मिल रहे हैं। इंदौर नगर निगम द्वारा शहर के नागरिकों के सहयोग से घर-घर कचरा  कलेक्शन,  गीला-सूखा कचरे का पृथक्कीकरण, सैनिटोन के तहत टॉयलेट एवं यूरिनल निर्माण तथा गीले सूखे कचरे के शत प्रतिशत प्रोसेसिंग सुनिश्चित की। इंदौर में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगइनों रहवासी बाजार एसोसिएशन एवं नागरिकों मीडिया, नगर निगम इंदौर के सफाई कर्मियों, अधिकारियों कर्मचारियों के सहयोग से वृहद जागरुकता अभियान इन तीन वर्षो में चलाया गया। इससे शहर की आदत बदली और इंदौर लगातार देश का स्वच्छतम शहर बनने का गौरव हासिल कर चुका है।

 

 

#MP#Garbage Free City

Source : Agency

पाठको की राय