Saturday, October 24th, 2026

राजस्व अमले के कामकाज में आएगी एकरूपता, बन रहा मानक कोश

भोपाल
प्रदेश के सभी जिलों में खसरों में अब भूमि और भूमि स्वामित्व के लिए अब एक जैसे शब्दों का उपयोग किया जाएगा। राजस्व विभाग भूमि और भूमिस्वामी से जुड़ी शब्दावलियों और राजस्व विभाग की अलग-अलग क्षेत्रों में  उपयोग किए जा रहे एक स्वरुप के शब्दों के लिए मानक   शब्दावली तैयार कर रहा है। हर विषय के लिए एक शब्द तय होने पर इन्हें समझने में आसानी होगी और इन शब्दों की पहचान पूरे प्रदेश में एक समान हो जाएगी।

इसके लिए राजस्व विभाग ने कुल 4 करोड़ 56 लाख अलग-अलग शब्दों चिन्हित कर उनके लिए मानक शब्दावली तैयार की है। अनेक राज्यों और छोटे अंचलों को जोड़कर मध्यप्रदेश राज्य का गठन हुआ था लेकिन प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में  एक ही प्रकार की विषय वस्तु ,एक ही प्रकार की भूमि और भूमिस्वामी के लिए अलग-अलग शब्दों का उपयोग किया जा रहा है। अब इनकी जगह एक मानक शब्द का उपयोग किया जाएगा।

राजस्व विभाग ने मानक श्ब्दावलियों को दर्शाने के लिए तीन श्रेणियां बनाई है।  परिशिष्ट एक में भूमिस्वामित्व को दर्शाने वाले शब्दों को शामिल किया गया है। श्रेणी दो में ऐसी भूमियों का उल्लेख किया गया है जिनमें स्थानीय तौर पर परीक्षण कर वर्गीकरण एवं संशोधन की आवश्यकता है। तीसरी श्रेणी में  परिभाषाओं का उपयोग किया गया है।

प्रदेश में अभी 2लाख 27 हजार 733 खसरों में भूमि का प्रकार अथवा भूमिस्वामी के प्रकार का उल्लेख नहीं है। ऐसे सभी खसरा नंबरों को एक भूमितालिका में श्रेणीबद्ध किया जाएगा।

बहुत सारी प्रविष्टियां स्थानीय तौर पर परीक्षण के उपरांत मानकीकृत की जाएंगी। तहसील स्तर से ऐसी प्रविष्टियों का अवलोकन कर उनका मानकीकरण किया जाएगा और हर शब्द को किसी एक मानक शब्द में शामिल किया जाएगा।

राजस्व विभाग ने  शासकीय भूमि में शामिल शासकीय, शासकीय संस्था, सेवा खातेदार, शासकीय पट्टेदार, निजी भूमि मे शामिल भूमि स्वामी, भूदानधारी, निजी संस्था और भूमिस्वामी अहस्तांतरणीय  तथा अन्य भूमियों में शामिल  शासकीय पट्टेदार, मौरुषी कृषक, आधिपत्य कृषक, वक्फ सम्पत्ति, आबादी, औकाफ डिपार्टमेंट, राहिन, नजूल पट्टेदार, देवस्थान जैसे स्वामित्वों के दायरे में आने वाली शासकीय, निजी, संस्था और बिना नामकरण वाली भूमियों के लिए अब मानक शब्द तय कर लिए गए है। इसमें कुल 4 करोड़ 56  लाख 36 हजार 422 शब्द समाहित किए गए है।

अभी तक प्रदेश में भूमि के प्रकार को दर्शाने के लिए शासकीय, शासकीय संस्था, शासकीय पट्टेदार,सेवा खातेदार शब्दों का उपयोग किया जाता था उनकी जगह अब शासकीय भूमि शब्द का प्रयोग होगा। इसी तरह भूमिस्वामी, भूदानधारी, निजी संस्था, भूमिस्वामी अहस्तांतरणीय की जगह निजी भूमि शब्द का प्रयोग होगा। वक्फ सम्पत्ति शब्द में अब वक्फ सम्पत्ति, वक्फ डिपार्टमेंट, वक्फ डिपार्टमेंट सम्पत्ति शब्दों को शामिल किया गया है। मौरुषी कृषक, आधिपत्य कृषक,शिकमी, दर शिकमी अब कहलाएंगे आधिपत्य कृषक शब्दों की जगह अब केवल आधिपत्य कृषक शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। भूमिस्वामी अहस्तांतरणीय शब्द में अब भूस्वामी अहस्तांतरणीय शासन से प्राप्त, भूमिस्वामी अहस्तांतरणीय, शाासकीय पट्टेदार से भूमिस्वामी,भूमिस्वामी शासन द्वारा प्रदत्त , शासकीय पट्टा अहस्ताऔर शासकीय पट्टे से भू शब्दो की जगह उपयोग किया जाएगा। देवस्थान और धार्मिक स्थान की जगह केवल  देवस्थान प्रयुक्त होगा। संस्था और ट्रस्ट की जगह केवल संस्था शब्द का उपयोग होगा। रोहिन,मुर्तहिन शब्दों की जगह  रोहिन/ मुर्तहिन का उपयोग होगा। सिचाई विभाग की जगह शासकीय संस्था उपयोग होगा।  इसी तरह वन कृषक,  अस्थाई पट्टेदार, साधारण कृषक,नजूल पट्टेदार,गैर हकदार शब्दों के लिए मानक शब्दों का उपयोग किया जाएगा।

 

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Source : Agency

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