कार्यवाही में किसी भी प्रकार की चूक नहीं होनी चाहिये - कलेक्टर
मुरैना
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशन में प्रत्येक जिलों में रेत, मिलावट, अतिक्रमण, शराब संबंधी कार्यवाही लगातार की जा रहीं है। मुरैना जिला प्रशासन भी कार्यवाही में पीछे न रहे, किन्तु कार्यवाही में किसी भी प्रकार की चूक नहीं होनी चाहिये। यह बात कलेक्टर श्री बी.कार्तिकेयन ने सोमवार को जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक को संबोधित करते हुये अधिकारियों से कही। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री आशुतोष बागरी, वनमंडलाधिकारी श्री स्वरूप दीक्षित, नगर निगम कमिश्नर श्री संजीव कुमार जैन, अम्बाह, मुरैना, जौरा और सबलगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, मायनिंग, आबकारी अधिकारी मौजूद थे।
कलेक्टर श्री बी.कार्तिकेयन ने कहा कि जिले में कार्यवाही कोर्डिनेशन के हिसाब से की जाये। कार्यवाही करते समय आपस में बर्तालाप करके अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवश्य बतायें। ऐसा न हो कि कोई कार्यवाही की और वरिष्ठ अधिकारियों को मालूम नहीं हो। उन्होंने कहा कि फोर्स की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ कोर्डिनेशन की। कलेक्टर ने कहा कि राजस्व, पुलिस, आबकारी, खनिज, वन विभाग कार्यवाही करने से पहले स्थल एवं सीकरेट बनाये रखें। किसी भी प्रकार की सूचना अधीनस्थों के माध्यम से न पहुंचे। कार्यवाही ऐसी हो, जो प्रदेश में देखी जा सके। उन्होंने कहा कि जिले में 119 वाहन ऐसे है, जिन्हें राजसात किया जाना है, किन्तु कारणबस उनका राजसात करना टल रहा है। इसलिये बड़ी कार्यवाही की जाये तो उसमें विलंब नहीं होना चाहिये। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि जो भी कार्यवाही करें, उसे जिला प्रशासन का नाम दें।
पुलिस अधीक्षक श्री आशुतोष बागरी ने कहा कि अधिकारियों से कहा कि फोर्स की कमी नहीं है, थाने से नहीं तो जिले से फोर्स उपलब्ध कराया जायेगा। किन्तु कार्यवाही प्लानिंग के साथ की जाये। कार्यवाही करने से पूर्व स्थल, रेकी देने वाला व्यक्ति मजबूत होना चाहिये। उन्होंने कहा कि भले ही अधिकारियों को अवैध ट्रेक्टर निकलते हुये पाये जायें, किन्तु प्लानिंग नहीं तो उन्हें पकड़ना संभव नहीं होगा। जो भी कार्यवाही करें, उसे एक दिन पहले सोचकर की जाये। उन्होंने कहा कि जो भी क्रिमियल लोग है, और उन पर 15 से अधिक अपराध दर्ज है, उनके जिला बदर के प्रकरण तैयार किये जाये।
डीएफओ श्री स्वरूप दीक्षित ने कहा कि कार्यवाही भले वन विभाग, मायनिंग, फूड, अतिक्रमण या जैसी क्यों न हो, इसके लिये हम तीनों अधिकारियों को बताना उचित समझें। तभी कार्यवाही को अंजाम दें। अधिकारी स्वयं को हीरो साबित न कहे।

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