Wednesday, October 21st, 2026

फिर उठी डॉ. हरी सिंह गौर को भारत रत्न देने की मांग, विश्वविद्यालय प्रशासन करेगा पहल

सागर
विख्यात कानूनविद,शिक्षाविद और सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न  देने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा है. डॉ हरीसिंह गौर की 152 वीं जयंती पर आयोजित 6 दिवसीय गौर उत्सव पर इस मांग को फिर हवा मिली है. बता दें कि देश की आजादी के पहले पिछड़ेपन का शिकार बुंदेलखंड इलाके में अपनी जमा पूंजी से विश्वविद्यालय स्थापित कर, जन्म भूमि का कर्ज चुकाने वाले डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से चल रही है. इसके लिए विश्वविद्यालय कार्य परिषद प्रस्ताव पास करके सरकार को भेज चुकी है. वहीं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों का संगठन इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने पर भी विचार कर रहा है.

सागर में एक गरीब परिवार में जन्मे डॉ हरिसिंह गौर ने ना सिर्फ वकालत के क्षेत्र में दुनिया भर में नाम कमाया. बल्कि शिक्षा वर्ग से जुड़े होकर भी उनकी ख्याति पूरे देश में फैली. दुनिया भर में उनकी वकालत की ख्याति को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सर की उपाधि दी थी. डॉ हरीसिंह गौर साइमन कमीशन के सदस्य थे, तो संविधान सभा के उपसभापति भी थे. इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति थे, तो नागपुर विश्वविद्यालय के भी कुलपति रहे. उन्होंने अपनी मातृभूमि सागर का कर्ज चुकाने के लिए अपने जीवन की जमा पूंजी दान करके 1946 में सागर में विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. उन्होंने अपनी वसीयत में विश्वविद्यालय के लिए दो करोड़ रुपए भी दान किए थे.

वैसे तो समय-समय पर डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठती रही है. लेकिन 2014 में इस मांग ने तब जोर पकड़ा, जब भारत सरकार द्वारा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिया गया. स्थानीय लोगों और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों का कहना है कि डॉ हरिसिंह गौर भी भारत रत्न के हकदार हैं,उन्होंने सागर विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए डॉ हरिसिंह गौर अपने जीवन की पूरी कमाई दान कर दी थी.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्तमान अध्यक्ष डीपी सिंह जब सागर विश्वविद्यालय के कुलपति थे, तो उनके प्रयासों से सागर विश्वविद्यालय कार्यपरिषद द्वारा डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर राज्य और केंद्र सरकार को भेजा गया था. तब सागर विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं था और मध्य प्रदेश सरकार का विश्वविद्यालय था. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर नागरिक संगठनों और छात्र संगठनों द्वारा समय-समय पर आंदोलन भी किए गए हैं.

विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों का संगठन गौर यूथ फोरम डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने के लिए कई तरह के प्रयास कर चुका है. गौर यूथ फोरम के संयोजक डॉ विवेक तिवारी ने बताया कि डॉ हरिसिंह गौर एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाई और कानूनविद के रूप में दुनिया भर में ख्याति हासिल की. हम समय-समय पर राजनीतिक दलों के नेताओं, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्री गणों से इस मांग को लेकर मुलाकात कर चुके हैं और आंदोलन भी किए. अब इस सिलसिले में हम अदालत का दरवाजा खटखटाने भी जा रहे हैं.

सागर विश्वविद्यालय जब अपने संस्थापक डॉ हरिसिंह गौर की जयंती उत्सव पूर्वक मना रहा है,तो एक बार डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. इस मामले में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता का कहना है कि मुझे इसकी जानकारी मिली है और मैंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अभी तक किए गए प्रयासों की जानकारी मांगी है. डॉ हरिसिंह गौर को भारत रत्न दिया जाता है,तो हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी.

 

 

#Dr. Hari Singh Gaur

Source : Agency

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