Friday, October 23rd, 2026

विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति की समृद्धि एवं ज्ञान परंपरा का विकास हो- अतुल कोठारी

सागर
स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं क्रियान्वयन विषय आधारित संगोष्ठी में उपरोक्त वक्तव्य शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी जी ने दिया। सर्वप्रथम कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी एवं संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी द्वारा केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा मदन मोहन मालवीय पुरस्कार से विभूषित किये जाने पर श्री अतुल कोठारी जी को शुभकामना प्रेषित की।

मा. कोठारी जी ने कहा कि शिक्षक समाज के सबसे ज्यादा सम्मानीय सदस्य हैं क्योंकि वो छात्र-छात्राओं के भविष्य एवं राष्ट्रीय उन्नति के लिए उनको निर्धारित ज्ञान, कौशल एवं नैतिक मूल्यों से अवगत कराते हैं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि उच्च शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर छात्रों को शिक्षित किया जाये साथ ही प्रत्येक विषय के पाठ्यक्रम का प्रारंभ ही वैदिक कालीन ज्ञान परंपरा के आधार पर हो जिसके द्वारा छात्रों में हमारे राष्ट्र के सर्वोत्तम ज्ञान से उनका भविष्य सुनिश्चित हो शिक्षा का संबंध न केवल विद्यार्थी अपितु विद्यार्थी के माध्यम से अभिभावक समुदाय से भी हो हमारी शिक्षा विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में लाभकारी हो, स्नातक कक्षाओं में ही शोध के लिए छात्रों को क्या सोचना है, मानसिकता को कैसे सोचना है इस पर विचार करने के लिए प्रेरित किया जाये, कार्यक्रम के माध्यम से बहुविषयक षिक्षा के लिए जागरूकता हो। जीवन कौशल को विकसित करने के लिए व्यावहारिक एवं कौशल विकास से ही परिचित कराया जाये।

स्वागत भाषण देते हुए संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने अपने आयाम-आत्मनिर्भर भारत, हथकरघा संचालन, मधुमक्खी पालन, माइक्रोबायोलॉजी लैब, जैविक खेती, की प्रगति के विषय से अतिथियों को अवगत कराया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. अजय तिवारी ने कहा कि- शिक्षण प्रक्रिया शिक्षार्थी केन्द्रित हो, जिज्ञासा अनुसंधान संवाद शैली अनुभव एवं लचीलापन पाठ्यक्रम में सम्मिलित हो जिससे शिक्षार्थियों के जीवन के सभी पक्षों और एकता का सन्तुलित विकास हो इससे छात्रों में करुणा, मुदिता, धैर्य, क्षमा एवं रोजगार के लिए सक्षम हो ऐसा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट दिखता है। शिक्षा में चाणक्य, नागार्जुन, मैत्रेयी, गार्गी, चरक, ऐसी विद्वानों का ज्ञान छात्रों को भारतीय संस्कृति के दर्शन करने में सहायक होगा।

स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में चल रहे चरित्र निर्माण एवं समग्र व्यक्तित्व विकास के आयामों एवं प्रकल्पों का अवलोकन करने के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के डीन एवं नीति आयोग के सदस्य डॉ. उन्नत पंडित जी ने अवलोकन उपरांत कहा कि- हमारा कार्य केवल शिक्षा देना नहीं बल्कि उच्चतर शिक्षा कार्यक्रमों के लिए अपेक्षित परिणाम भी आवश्यक है। इसके लिए अनुसंधान विषय संबंधी शोध पत्र के लिए भी छात्रों को प्रेरित करना होगा इससे हमारे उच्चतर शिक्षा संस्थान सशक्त बनेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अनुसंधान की गुणवत्ता को भी सम्मिलित किया गया और बहुविषयी समग्र शिक्षा पर जोर देते हुए स्नातक पाठ्यक्रम में अनुसंधान का समावेश प्रबंधन प्रणाली एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार है।

झाबुआ से पधारे श्री ओम शर्मा क्षेत्रीय संयोजक चरित्र निर्माण एवं समग्र व्यक्तित्व विकास ने कहा कि-  पहले की शिक्षा प्रणाली मूल रूप से सीखने और परिणाम देने पर केंद्रित थी। विद्यार्थियों का आकलन प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाता था। यह विकास के लिए एक एकल दिशा वाला दृष्टिकोण था। लेकिन नई शिक्षा नीति एक बहुविषयक  दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर केंद्रित है। जिसका उद्देश्य विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करना है।

मा. अतुल कोठारी जी के निर्देशानुसार कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी एवं प्रभारी कुलपति डॉ. नीरज तोपखाने के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन हेतु टास्क फोर्स का गठन किया गया जिसमें सात सदस्यीय समिति क्रियान्वयन हेतु सतत प्रयत्नरत रहेगी। गोष्ठी के समापन अवसर पर अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष शर्मा द्वारा विश्वविद्यालय शैक्षिक परिवार की तरफ से यह संकल्प लिया गया कि सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अक्षरशः पालन करते हुए उसका क्रियान्वयन करेंगे। इस अवसर पर डॉ. मनीष मिश्र, डॉ. सुनीता जैन, श्री हरेन्द्र सारस्वत, डॉ. सचिन तिवारी, डॉ. बी.व्ही.तिवारी, डॉ. शैलेन्द्र पाटिल, डॉ. सुखदेव बाजपेयी, डॉ. आर.नाथ, एवं विश्वविद्यालय के सभी शैक्षिक, अषैक्षिक कर्मचारी उपस्थित रहे। शांति मंत्र के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

 

Source : Agency

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