हाई कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई भ्रष्टाचार की जांच सुप्रीम कोर्ट ने रोकी
रायपुर
छत्तीसगढ़ में राज्य संसाधन केंद्र (एसआरसी) और भौतिक रेफरल पुनर्वास केंद्र से जुड़े कथित घोटाले में हाई कोर्ट के सीबीआई को एफ़आईआर दर्ज करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है.
आरोप है कि दस सालों के दौरान इन केंद्रों में एक हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की गई है. बीते साल जनवरी में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.
आरोप है कि राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इन केंद्रों के पैसे में भ्रष्टाचार किया. अदालत ने इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज करने का आदेश दिया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में 31 लोगों को जवाबदेह बनाया था जिनमें कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे लेकिन इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि आदेश पारित किए जाने से पहले उन सब लोगों को नोटिस दिया गया था.
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि इस याचिका को फिर से सुना जाए और मेरिट के आधार पर निर्णय दिया जाए.
अदालत को बताया गया है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने बीते साल फ़रवरी में मुक़दमा दर्ज कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि यदि हाई कोर्ट फिर से याचिकाकर्ता के हक़ में फ़ैसला देता है तो एफ़आईआर पर आगे जांच की जा सकेगी.
अदालत ने कहा कि जब तक इस मामले में हाई कोर्ट का निर्णय नहीं आता है सीबीआई अपनी जांच ना करे. अदालत ने हाई कोर्ट से कहा है कि इस मामले पर तेज़ी से सुनवाई की जाए. अब सभी पक्ष 28 अक्तूबर को हाई कोर्ट के समक्ष पेश होंगे.
हाई कोर्ट के समक्ष पेश याचिका में दावा किया गया है कि इन केंद्रों पर काम कर रहे लोगों को सरकारी कर्मचारी के तौर पर दिखाया गया था और उनके वेतन के नाम पर मोटा पैसा सरकार से लिया गया लेकिन इन लोगों को कभी वेतन नहीं दिया गया. याचिकाकर्ता ने दावा किया गया था कि ऐसे लोगों को सिर्फ़ दस्तावेज़ों में पीआरसी और पीआरआरसी का कर्मचारी दिखाया गया.

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