जो निर्माण कार्य 6 साल में नहीं हो सके पूरे अब तीन माह में निपटाने के निर्देश
भोपाल
प्रदेश के स्कूलों में निर्माण कार्यों के लिए बजट जारी होने के बाद भी अफसरों की लेटलतीफी के चलते छह साल में भी हजारों निर्माण कार्य पूरे नहीं हो पाए है। अपूर्ण निर्माण कार्य पूरे नहीं होने पर राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक ने भारी नाराजगी जताई है।
उन्होंने इसके लिए उत्तरदायी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करने और तीन माह के भीतर अधूरे निर्माण कार्य पूरे कराने के निर्देश दिए है। प्रदेश के 27 जिले ऐसे है जहां वर्ष 2015-16 से हर जिले में पांच सौ से अधिक काम पूरे नहीं हो पाए है।
नौ जिले तो ऐसे है जहां एक हजार से अधिक काम अधूरे पड़े है। इन जिलों में दमोह में 1264, सतना में 1223, धार में 1206, बालाघाट में 1168, रीवा में 1150, टीकमगढ़ में 1126, सागर में 1117, रायसेन में 1030,बड़वानी में 1014 काम अधूरे पड़े है। इनके अलावा कटनी, सिवनी, खरगौन, उज्जैन, अलीराजपुर, जबलपुर,सिंगरौली, गुना, श्योपुर, अनूपपुर, विदिशा, डिंडौरी, ग्वालियर, आगरमालवा, मुरैना, मंडला , उमरिया और झाबुआ में भी पांच-पांच सौ से अधिक काम अधूरे पड़े है।
प्रदेश के सत्रह जिले ऐसे है जहां वर्ष 2014-15 से पचास-पचास से अधिक काम अधूरे पड़े है। कहीं स्कूल भवन नहीं बन पाया है तो कहीं प्रयोगशाला नहीं बन पाई है। कहीं बाउंड्रीवाल अधूरी है। कहीं शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा होना बाकी है। कहीं नालियां तो कहीं अंदरूनी सड़कें नहीं बन पाई है। राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक धनराजू एस ने सभी अधूरे निर्माण कार्य तीन माह में पूरे कराने के निर्देश अफसरों को दिए है। निर्माण कार्य की वर्ष 20-21 में स्पीलओवर राशि व्यय नहीं होने के कारण लंबित है। जिसके कारण वर्ष 21-22 में नवीन निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुए लगभग आठ जिलो में दस करोड़ से 21 करोड़ तक और बीस जिलों में पांच करोड़ से दस करोड़ की राशियां लंबित है।
सभी मदवार स्पीलओवर राशि का आंकलन करते हुए तत्काल निर्माण कार्यों की राशि संबंधित एजेंसी को जारी कर निर्माण कार्य पूरा कराने को कहा गया है। इसकी पूरी जानकारी भी मांगी गई है। जिन निर्माण कार्यों को अब कराने की जरूरत नहीं है और उन्हें विलोपित कराने की जरूरत है उनमें भी प्रस्ताव की राशि वापस करते हुए पंद्रह दिन में प्र्रस्ताव मांगा गया है ताकि उन कामों को विलोपित किया जा सके।
जिन जिलों में वर्ष 14-15 के पचास से अधिक निर्माण कार्य अपूर्ण है तथा वर्ष 15-16 से 20-21 तक पचास प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य अपूर्ण हैं उन जिलों के डीपीसी, एपीसी वित्त, सहायक यंत्री तथा उपयंत्री का वेतन काम पूरा न होने तक नहीं किया जाएगा और जो लोग संविदा पर है उनकी संविदा अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी।

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