श्रोताओं ने लिया सुर , साज और संगीत की त्रिवेणी का आनंद
( अमिताभ पाण्डेय )
भोपाल । राजधानी में पोलीटेक्निक चौराहे के समीप स्थित पोलीटेक्निक कालेज सभागार में आज की शाम संगीत की स्वर लहरियां गूंज उठी । शास्त्रीय संगीत के जाने माने कलाकार जब सुर, साज और मधुर आवाज के साथ मंच से अपना जादू बिखेरने लगे तो श्रोता इस संगीतमय आनंद में डूब गए। स्वर लहरी से साभार गूंज उठा ।
सभागार में दो दिवसीय संगीतमय आयोजन की यह पहली संगीत संध्या थी । इस आयोजन को विदुषी वीणा सहस्त्रबुद्धे स्मृति संगीत समारोह का नाम दिया गया है।
यह आयोजन संगीतप्रेमियो की संस्था कला समूह द्वारा किया जा रहा है।
इस दो दिवसीय समारोह के पहले दिन आज शाम नासिक से पधारे डॉ आशीष रानडे और अहमदाबाद की गायिका डॉ मोनिका शाह ने अपने गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया । गायन के आरंभ में डॉ आशीष रानडे ने शास्रीय संगीत का राजा राग कहा जाने वाला राग यमन कल्याण को चुना। बड़ी बंदिश एक ताल में निबद्ध थी जिसके बोल थे "मेरा मनवा" और छोटी बंदिश तीन ताल में निबद्ध थी जिसके बोल "श्याम ने बजाई बंसी" थे ।
अपने गायन का समापन उन्होंने एक भजन से किया। गायन में तबले पर संगत डॉ. अशेष उपाध्याय ने की और हारमोनियम पर पुणे के उपेंद्र सहस्त्रबुद्धे ने साथ दिया।
इसके उपरांत मंच पर प्रस्तुति देने आई डॉ. मोनिका शाह । उन्होंने राग जयजयवंती प्रस्तुत किया। एक ताल में निबद्ध बड़े ख्याल बंदिश के बोल थे "लरा माई सजनी" और छोटे ख्याल के बोल थे "बिनती का करिए सजनी" । उसके बाद उपशास्त्रीय गायन का आरंभ करते हुए डा. शाह ने ठुमरी कजरी और दादरा प्रस्तुत किये जिन्हें श्रोताओं ने बहुत पसंद किया। राग मांझ खमाज में ठुमरी के बोल थे " जाग पड़ी मैं तो लिया के जगाये" , राग मिश्र पीलू में कजरी के बोल थे "घिर आयी है कारी बदरिया" और अंत में दादरा से उन्होंने अपने गायन का समापन किया जिसके बोल थे "दीवाना कीजे श्याम" । उनके साथ तबले पर रामेंद्र सिंह और हारमोनियम पर उपेंद्र सहस्त्रबुद्धे ने संगत की।
मंच संचालन कविता रावत और कोशिका सक्सेना ने किया। कला समूह के संगीत साधक राजेश भट ने बताया कि ये आयोजन लगातार सातवें वर्ष किया जा रहा है। इसमें हर वर्ष देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है। आज के आयोजन में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

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