करोड़ों खर्च के बाद भी जमा नहीं हो रहा टैक्स
भोपाल
घर बैठे प्रॉपर्टी टैक्स समेत अन्य सुविधाओं को मुहैया करवाने का दावा प्रशासन का झूठा साबित हुआ है। ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर और भोपाल प्लस एप किसी काम के नहीं है। आला अधिकारियों ने बाहरी कंपनियों से यह सॉफ्टवेयर और एप डेवलप करवाए। इनके नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किये, लेकिन काम में कोई नहीं आ रहा। 250 करोड़ की लागत से डेवलप किया गया ई-नगरपालिका सॉफ्टवेयर पर नगर निगम भोपाल काम नहीं करना चाहता। 6 करोड़ का भोपाल प्लस एप एक-डेढ़ साल से बंद है। प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने के दौरान आ रही दिक्कतों से निगम पिछले साल से जूझ रहा है।
ढेरों शिकायतों के बावजूद सॉफ्टवेयर में कोई सुधार नहीं हुआ तो आखिरकार बीएमसी को ई नगरपालिका सॉफ्टवेयर से कन्नी काटनी पड़ रही है। चूंकि अब निगम खुद का सॉफ्टवेयर डेवलप करने का मन बना चुका है, जिसके नाम पर फिर करोड़ों रुपए फूं कने की तैयारी की जा रही है।
व्यापमं के मामले में जिस कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने उसी कंपनी से ई नगरपालिका सॉफ्टवेयर डेवलप करवाया था। हैदराबाद की इस कंपनी का नाम पर यूएसटी ग्लोबल है। इस कंपनी ने 250 करोड़ से अधिक लागत में इस सॉफ्टवेयर को डेवलप किया। जिस पर निगम को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं।
स्मार्ट सिटी भोपाल द्वारा भोपाल प्लस एप पर 6 करोड़ रूपए आंख बंद करके फूंक दिये गए हैं। इस एप के जरिए शहर के नागरिकों को घर बैठे कई प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। यह एप पिछले एक-डेढ़ साल से बंद है। यह एप इसलिए फैल हुआ क्योंकि इस काम में जनप्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया। यूजर कम होने के कारण एप को बंद करना पड़ा।
प्रशासन के आला अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के कारण सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं। सॉफ्टवेयर और एप डेवलप के नाम पर दिखावे के लिए बाहरी कंपनी को काम सौंपा जाता है, लेकिन इन कंपनियों की आड़ में अफसर अपने लोगों से काम करवाते हैं। इसका नतीजा यह हैं कि यह सॉफ्टवेयर काम नहीं करते।
निगम ने 2011 में एमएएस सिस्टम करीब 4 करोड़ की लागत से तैयार करवाया था। यह सिस्टम ई नगरपालिका सॉफ्टवेयर से कहीं अधिक ज्यादा अच्छा साबित हुआ था। इस सिस्टम में काम के दौरान कभी कोई दिक्कत नहीं आई थी।

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