सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण पर राज्य सरकार को दिया झटका , रिव्यू पिटिशन लगाई जाएगी
भोपाल
मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों (पंचायत और नगरीय निकाय 2022) में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिए है कि 15 दिन के अंदर पंचायत चुनाव एवं नगर पालिका चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए। ओबीसी आरक्षण के मामले में प्रदेश की भाजपा सरकार की रिपोर्ट को कोर्ट ने अधूरा माना। ऐसे में अब अधूरी रिपोर्ट होने के कारण मध्य प्रदेश के ओबीसी वर्ग को पंचायत एवं नगर पालिका में आरक्षण नहीं मिलेगा।
दरअसल, राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित करने की अनुशंसा सरकार से की है। इस आशय की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तुत की जा चुकी है। आयोग का दावा है कि प्रदेश में 48 प्रतिशत मतदाता ओबीसी है, इसलिए इस वर्ग को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। इस मामले में सरकार पहले ही कह चुकी है कि हम माननीय अदालत के निर्देशानुसार चुनाव कराने के लिए तैयार हैं।
आज सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में सुनवाई की है, जिसमें मध्य प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग को स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों को फिर से सामान्य श्रेणी में अधिसूचित करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि आरक्षण देने से पहले ट्रिपल टेस्ट की कसौटी को 1 हफ्ते में पूरा कर लेंगे।
पिछड़ा वर्ग आयोग ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके मुताबिक 49 फीसदी आबादी OBC है, ऐसा नहीं होना चाहिए कि इतनी बड़ी आबादी स्थानीय निकाय में प्रतिनिधित्व से वंचित रह जाये, इसके लिए उन्होंने समय मांगा था। इस आधार पर रिपोर्ट में त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव में ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा करते हुए राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। इसे विगत शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज 10 मई को अंतिम फैसला सुनाया है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान(CM Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश सरकार रिव्यू पिटिशन लगाएगी । सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या आया है, अभी हम उसका अध्ययन कर रहे हैं। पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ हों, इसको लेकर रिव्यू पिटिशन लगाई जाएगी।
कांग्रेस प्रवक्ता सैयद जफर ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर ट्वीट कर लिखा है कि ओबीसी आरक्षण के मामले में प्रदेश की भाजपा सरकार की रिपोर्ट को माना अधूरा अधूरी रिपोर्ट होने के कारण मध्य प्रदेश के ओबीसी वर्ग को नहीं मिलेगा पंचायत एवं नगर पालिका में आरक्षण। प्रदेश सरकार की प्रशासनिक भूल या ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई बड़ा षड्यंत्र।जल्द करेंगे हम खुलासा।
कांग्रेस प्रवक्ता सैयद जफर ने आगे लिखा है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संविधान की जीत प्रदेश सरकार द्वारा लगातार गैर संवैधानिक कार्यों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार कोर्ट का अहम फैसला 15 दिन के अंदर पंचायत एवं नगर पालिका के चुनाव की अधिसूचना जारी करें प्रदेश सरकार ।
शिवराज सरकार को झटका
राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था और मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। आयोग ने OBC को 35% आरक्षण देने की सिफारिश की थी। लेकिन, राज्य सरकार OBC आरक्षण को लेकर कोर्ट के आदेश अनुसार ट्रिपल टेस्ट नहीं करा सकी। कोर्ट ने कहा है कि OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट को पूरा करने के लिए और समय नहीं दिया जा सकता। बिना OBC आरक्षण के ही स्थानीय निकाय के चुनाव कराए जाएंगे।

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