Tuesday, October 20th, 2026

16 वर्ष से संघर्ष, न खेत बचे न मुआवजा मिला

लखनऊ
एलडीए की प्रबंध नगर योजना के दो गांव के किसानों को 16 वर्ष बाद भी न उनकी जमीन का मुआवजा मिल पाया है और ना ही उनके खेत बचे है। वह न खेती कर पा रहे हैं और न अपने खेत बेच पा रहे हैं। प्राधिकरण की ढिलाई से योजना से करीब 300 किसानों की कमर टूट गई है। उनके बच्चों की जहां पढ़ाई लिखाई छूट गयी हैं वहीं कुछ के बेटे बेटियों की शादी नहीं हो पा रही है।

प्रबंध नगर योजना के लिए एलडीए ने 2005-2006 में जमीन अधिग्रहित की थी। लगभग 766 हेक्टेयर जमीन घैला व अल्लूनगर डिगुरिया तथा इनके आठ मजरों की अधिग्रहित हुई थी। लेकिन आज तक इन गांव के किसानों को एलडीए से मुआवजा नहीं मिल पाया है। शुरुआत में एलडीए ने मुआवजा बेहद कम निर्धारित किया था। जिससे किसान मुआवजा लेने को तैयार नहीं हए थे। तब वह बाजार की दर पर मुआवजा मांग रहे थे। अब किसान मुआवजा मांग रहे हैं तो एलडीए इस पर निर्णय नहीं ले पा रहा है। जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा। वह परेशान है मुख्यमंत्री से भी गुहार लगा रहे हैं। 80% किसान एलडीए को सीधे जमीन देने को तैयार लेकिन एलडीए शासनादेश के मुताबिक अभी तक जमीन की दरें ही निर्धारित नहीं कर पाया है।
 
एलडीए ने जमीन बेचने पर लगा रखी है रोक
एलडीए ने प्रबंध नगर योजना में जमीन की बिक्री पर रोक लगा रखी है। जिलाधिकारी और निबंधन कार्यालय को पत्र देकर पहले ही जमीनों की बिक्री पर रोक लगायी थी। क्योंकि जमीन का अधिग्रहण एलडीए के नाम हो चुका है और दस्तावेजों में उसका नाम आ चुका है इसलिए किसान अपनी ही नहीं बेच पा रहे हैं।
 
इसलिए फंसा हुआ है पेंच
-- जमीन की दरें निर्धारित नहीं हो पा रही हैं
-- उच्च न्यायालय से अभी भी कुछ मामले में रोक लगी हुई है
-- एलडीए के स्तर से किसानों के साथ मीटिंग नहीं की जा रही
--- जमीन के कीमतें निर्धारित करने के लिए पूर्व में जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कमेटी बनाई थी। इस कमेटी की बैठक भी नहीं हो पाई
--पहले इस योजना के घैला गांव की काफी जमीन ग्रीन वेल्ट में में थी। इसलिए पर्यावरण विभाग ने इस पर रोक लगायी थी। आज तक एलडीए को एनओसी नहीं दी है।
 
जिला जज के यहां जमा है 203.39 करोड़ मुआवजा
योजना के किसानों को मुआवजा देने के लिए एलडीए ने 203.39 करोड़ से अधिक रकम जिला जज की अदालत में जमा करा रखा है। यह रकम जमा हुए 10 वर्ष से अधिक हो गये हैं। जमीन की कीमतें तय न होने से किसानो को यह नहीं मिल पा रही है।
 
न किसान क्रेडिट कार्ड बन रहा है न बैंकों से मिल रहा लोन
इन दो गांवों व इनके आठ मजरों के किसानों को न किसान क्रेडिट कार्ड से लोन मिल पा रहा है और न ही बैंक से। क्योंकि किसानों की जमीनें एलडीए के नाम दर्ज हो चुकी हैं। इसीलिए बैंक इन्हें लोन व किसान क्रेटिड कार्ड नहीं दे रहा है।
 
मकान भी गिरा दे रहा है एलडीए
जो लोग मकान बना रहे हैं उनके मकान भी एलडीए गिरा दे रहा है। योजना के कई मकान मौके पर जमीनदोज मिले। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी कोई सुनवायी नहीं हो रही है।

 

Source : Agency

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