राज्य शासन ने सजा माफी अनुशंसा के लिए बनाई समिति, अब एक साल पहले सजा से छूट
भोपाल
अब प्रदेश के जेंलों में बंद कैदियों को अच्छे व्यवहार पर सजा में छूट एक साल पहले मिल जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य शासन ने कैदियों को सजा में माफी देने के संबंध में विचार कर अनुशंसा प्रस्तुत करने के लिए समिति का गठन कर दिया है।सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए है।
जेल विभाग हर साल राष्टÑीय पर्व जैसे गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्य की अथवा अन्य राज्य की जेलों में कैद बंदियों को विशेष माफी की स्वीकृति जारी करता है। जेलों में सजा भुगत रहे बंदियों को किस अधिनियम की कौन-कौन सी धाराओं के अंतर्गत विशेष माफी की मंजूरी दी जाती है अथवा वंचित रखा जाता है इसके लिए राज्य सरकार ने फरवरी 2011 में गठित समिति द्वारा अनुशंसाएं प्रस्तुत की गई थी। इस समिति की अनुशंसाओं के आधार पर जेल विभाग ने जनवरी 2012 में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के अनुरुप ही सजा में छूट एवं माफी संबंधी कार्यवाही की जाती रही है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा क्रिमिनल अपील विक्रम सिंह एवं अन्य विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन में पारित आदेश में बंदियों की सजा में छूट एवं माफी देने के संबंध में प्रचलित शासन की नीति के अंतर्गत पंद्रह वर्ष की सजा भुगतने तथा परिहार सहित 21 वर्ष की सजा भुगतने के उपरांत ही सजा में छूट का प्रावधान है। इसे पंद्रह के स्थान पर चौदह वर्ष की सजा को मान्य करने पर विचार करने के निर्देश दिए गए है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश के अनुक्रम में राज्य के दांडिक अधिकारिता वाले न्यायालयों द्वारा सिद्धदोष बंदियों को जो इस राज्य की अथवा अन्य राज्यों की जेलों में कैद है उन्हें सजा में माफी देने के संबंध में विचार कर अनुशंसा देने के लिए अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। समिति में प्रमुख सचिव विधि एवं विधाई, अपर सवि जेल सदस्य होंगे जबकि महानिदेशक जेल एवं सुरक्षात्मक सेवाएं सदस्य सचिव बनाए गए है।

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