मध्यप्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स रोकेगी टी बी की बीमारी
( अमिताभ पाण्डेय )
ट्यूबरक्लोसिस अथवा टी बी की बीमारी मानवता के लिए चिंता का विषय है।
यह ऐसी संक्रामक बीमारी है जिसके कारण हर साल दुनियाभर में 50 लाख से अधिक लोग मारे जाते है।
इससे सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी नुकसान होता है। भारत में इस बीमारी से प्रति वर्ष 3 लाख 50 हजार से अधिक लोग मारे जाते हैं। दुनियाभर में टी बी से होने वाली मौत का लगभग 34 प्रतिशत भारत में होती है। हमारे देश में कुल जनसंख्या का लगभग 26 प्रतिशत टी बी की बीमारी से पीड़ित है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो अपनी बीमारी का सही उपचार नहीं करते या थोड़ा स्वस्थ होते ही दवा लेना बंद कर देते हैं। ऐसे लोगों के कारण ही यह बीमारी उनके परिवारजनों को होने की संभावना बढ़ जाती है।
हमारे देश में टी बी की बीमारी से हर एक घंटे में लगभग 4 हजार लोगों की मौत होती है।
इस बीमारी को रोकने के लिए अब मध्यप्रदेश में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य शासन के स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है।
यह फोर्स मध्य प्रदेश के 23 शासकीय मेडिकल कॉलेज के टीबी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को मिलाकर बनाई गई है।
इसके चेयरमैन डॉ निशांत श्रीवास्तव होंगे जोकि पलमोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट भोपाल में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
यह फोर्स टी बी के बचाव और उपचार के लिए मध्य प्रदेश के सभी 52 जिलों में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों, कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से काम करेगी ।
टी बी मरीजों को बचाव और उपचार की सुविधा आसानी से मिले , इसके लिए भोपाल के ईदगाह क्षेत्र में स्थित स्टेट टीबी अस्पताल में हेल्थ डेस्क शुरू की जा रही है ।
हेल्थ डेस्क के माध्यम से लोग घर बैठकर अपने मोबाइल फोन से विशेषज्ञ चिकित्सकों से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
मोबाइल नंबर 72249 15608 पर फोन करके अथवा इसी नंबर पर व्हाट्सएप कर के कोई भी व्यक्ति अब टी बी की बीमारी से बचाव और उपचार के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस मोबाइल नंबर के माध्यम से टी बी मरीजों की समस्याओं का समाधान घर बैठकर ही हो सकेगा।
इससे उनके समय और धन की बचत होगी।
इस बारे में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के डॉक्टर विश्वास गुप्ता ने बताया कि मोबाइल के माध्यम से टी बी मरीजों का समाधान करने का काम 24 मार्च से प्रारंभ होगा।
नागरिक मोबाइल नंबर 72249 15608 नंबर पर दोपहर 11 बजे से 1 बजे के बीच टी बी संबंधी सवालों के जवाब प्राप्त कर सकते हैं ।
टीवी से बचाव और उपचार के बारे में सभी समस्याओं का समाधान आसानी से हो सकेगा। यह सुविधा सभी टी बी मरीजों के लिए बहुत लाभकारी साबित होगी।
एक प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि ट्यूबरक्लोसिस के बारे में हमारे समाज में बहुत गलतफहमियां हैं ।
टी बी की बीमारी को लोग छुआछूत से जोड़ लेते हैं ।
इस बीमारी को छुपाना चाहते हैं, जिससे यह बीमारी बढ़ जाती है। बीमारी को छुपाने के कारण और संक्रामक होने के कारण यह परिवार के अन्य सदस्य को भी अपना शिकार बनाती है।
जिन लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो , बार बार खांसी हो, ज्यादा पैदल चलने में परेशानी हो ऐसे लोगों को अपनी जांच निकट के सरकारी अस्पताल में जरूर करवाना चाहिए ।
टी बी की जांच और इसका उपचार निशुल्क है।
इसके उपचार के लिए शासन की ओर से गुणवत्तापूर्ण दवाइयां भी फ्री में दी जाती है।
टी बी के जो मरीज हैं, उन्हें शासन की ओर से हाल ही में 500 रुपए प्रति माह के हिसाब से पोषण भत्ता भी देना प्रारंभ किया गया है। मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाकों में रहने वाले लोगों में से यदि आदिवासी समुदाय के किसी व्यक्ति को यह बीमारी हो तो उसे पोषण भत्ते के रूप में ₹750 दिए जाते हैं ।
राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टी बी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश के सभी जिलों में सघन एक्टिव केस फाइंडिंग गतिविधि चलाई जा रही है। टी बी प्रिवेंटिव थेरेपी और ट्राइबल टी बी इंतरवेंशन जैसे कार्यक्रम के माध्यम से टी बी के मरीजों को खोज , जांच और उनका उपचार किया जा रहा है। भोपाल जिले को टी बी मुक्त करने के लिए आई सी एम आर द्वारा माडल जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के 10 जिलों को सब नेशनल
सर्टीफिकेशन के लिए नामांकित किया गया है। इसमें शोयोपुर जिले को गोल्ड केटेगिरी हेतु नामांकित किया गया है।
मध्यप्रदेश में एम डी आर टी बी के मरीजों के उपचार के लिए नई दवा बेडाक्विलिन और डेलामेनिड
निशुल्क दी जा रही है।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 371 टी यू , 902 डी एम सी , 1 आई आर एल , 4 सी एंड डी एस टी लेब संचालित है।
डॉ गुप्ता ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि जो लोग एचआईवी, एड्स , डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं अथवा लगातार बीड़ी सिगरेट का सेवन करते हैं ।
उन लोगों में टीबी होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। भारत में प्रतिवर्ष 3 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग टी बी के कारण मारे जाते हैं ।
भारत में प्रति घंटे 4 हजार से अधिक लोगों की मौत टी बी के कारण होती है।
मध्यप्रदेश में भी टी बी की बीमारी के बहुत मरीज हैं जिनका शासन स्तर पर उपचार लगातार जारी है।
यदि कोई व्यक्ति अपनी बीमारी को छुपाता है तो वह अपने परिवारजनों और समाज का नुकसान करता है । टी बी के मरीज के संक्रमण से परिवार के अन्य सदस्यों को बचाने के लिए ट्यूबर प्रिवेंटिव थेरेपी के माध्यम से निशुल्क दवाइयां दी जा रही है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से ऐसा एप विकसित किया जा रहा है जो किसी व्यक्ति के बोलने पर ही टी बी की बीमारी की पहचान कर लेगा ।
उल्लेखनीय है कि टी बी ऐसी संक्रामक बीमारी है जिसको यदि छुपाया गया और उपचार नहीं किया गया तो यह अपने आसपास रहने वाले लोगों को भी संक्रमित करती है।
ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम आगे आएं । जागरूकता को बढ़ाएं। टी बी की बीमारी के बचाव और उपचार में अपना यथासंभव योगदान दें।

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