लघु वनोपज संग्राहकों को मिलने लगा मेहनत का वाजिब दाम
कांकेर
आदिवासी अंचल में रहने वाले अधिकांश वनवासियों का जीवन और रोजगार जंगल और उनके उत्पादों पर निर्भर रहता है। बिचौलिये इनसे कीमती वनोपजों की कम दामों में खरीदारी कर अधिक मुनाफा कमाते रहे हैं। वनवासियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर वनोपजों के समर्थन मूल्य में दाम बढ़ाने और उनका दायरा बढ़ाने से संग्राहकों को उनकी मेहनत की वाजिब कीमत मिलने लगा है। इस फैसले ने औने-पौने दाम में बिकने वाले लघु वनोपज को अब मूल्यवान बना दिया है।
उत्तर बस्तर कांकेर जिले में ही तक पिछले तीन वर्षों में 06 लाख 42 हजार 589 क्विंटल लघु वनोपज की खरीदी की गई है, जिसके लिए संग्राहकों को 18 करोड़ 55 लाख 77 हजार रुपए का भुगतान किया गया है। इसी अवधि में सरकार ने कांकेर जिले में 05 लाख 95 हजार से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता की खरीदी कर 4 हजार प्रति मानक बोरा की दर से संग्राहकों को 2 अरब 38 करोड़ 26 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया है। जिले में ईमली, महुआ, टोरा, चिरौंजी, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, हर्रा, बेहड़ा, सालबीज, कचरिया जैसे लघु वनोपजों का संग्रहण स्थानीय निवासियों द्वारा किया जाता है। लघु वनोपज की खरीदी महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से करने से संग्राहकों के साथ ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

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