Wednesday, June 10th, 2026

NITI Aayog रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, MP में 10 साल में 33 लाख से ज्यादा बच्चों ने छोड़ा प्राइमरी स्कूल

भोपाल
 मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2024–25 के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश पिछले एक दशक में प्राथमिक स्कूली बच्चों के दाखिले के मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।

30 फीसदी गिरा आंकड़ा
आंकड़े बताते हैं कि एक दशक पह
ले मध्य प्रदेश का प्राइमरी स्कूल एनरोलमेंट रेशियो करीब 109.3% हुआ करता था, जो अब लगभग 30 फीसदी गिरकर महज 76.3% पर सिमट गया है। देश के किसी भी बड़े राज्य में यह गिरावट सबसे बड़ी और चौंकाने वाली है। इस मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति केवल बिहार (77.2%), गुजरात (79.6%), उत्तर प्रदेश (83.1%) और राजस्थान (88.3%) जैसे राज्यों के समकक्ष या उनसे भी बदतर हो चुकी है।

लाखों बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में इस स्तर की गिरावट का मतलब है कि लाखों बच्चे औपचारिक प्राथमिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो चुके हैं। इसके पीछे स्कूलों तक पहुंच की कमी, बीच में पढ़ाई छोड़ना, परिवारों का पलायन या फिर डेटा एंट्री में लापरवाही जैसे गंभीर कारण हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है, इसलिए यहां प्रतिशत में मामूली बदलाव का असर भी लाखों बच्चों पर पड़ता है। इस भारी गिरावट के असली कारणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे सच में स्कूल छोड़ रहे हैं, तो हमें मिड-डे मील को मजबूत करने, मुफ्त परिवहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैश ट्रांसफर जैसी योजनाओं पर तुरंत काम करना होगा।

मेघालय ने बनाया इतिहास
इसके विपरीत, देश के छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पूर्वोत्तर का मेघालय 180.7% के साथ देश में सबसे आगे है, जबकि मणिपुर, मिजोरम, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों में नामांकन दर 100 प्रतिशत से भी ऊपर है, जो दिखाता है कि वहां तय उम्र से ज्यादा के बच्चे भी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। इस गंभीर गिरावट पर मध्य प्रदेश पेरेंट्स एसोसिएशन ने नीतिगत दखल की मांग की है।

 

#NITI Aayog

Source : Agency

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