स्कूल भवन जर्जर छात्रों को अन्यत्र स्कूल में पढाया जा रहा
मैनपुर
वर्ष 1993 से संचालित उरमाल हाई स्कूल में अध्यनरत छात्रों की हालत ऐसी है कि उन्हें विगत दो वर्षो से भवन की जर्जर हालत के चलते अपने स्कूल भवन को छोड़कर अन्यत्र दूसरे स्कूल में बैठकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ रही है। ह्यवर्ष 1990 में यह जो बिल्डिंग हाई स्कूल भवन के नाम से स्वीकृत हुई थी और इसमें कक्षा 9वी से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं अध्यापन कर रहे थे। लेकिन विगत 2 या 3 साल से यह भवन जर्जर हो जाने के चलते यहां के छात्र छात्राओं को उरमाल मिडिल स्कूल व प्राइमरी स्कूल में ही बैठकर अध्यापन करना पढ़ रहा है । जिसके चलते कक्षा पहली से 12वीं तक की पढ़ाई प्रभावित हो रही है क्योंकि कक्षा पहली से बारहवीं तक के बच्चों की संख्या अधिक होने के चलते दो पालियों में कक्षाएं संचालित करनी पढ़ रही है ।प्राइमरी व मिडिल स्कूल सुबह संचालित होती है । उनकी छुट्टी होने के बाद ही हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी की कक्षाएं संचालित होती है जिसके चलते सभी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
क्योंकि हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी की पढ़ाई करने उस क्षेत्र के कई गांव के बच्चे आते हैं और पर्याप्त जगह व साधन नहीं होने के चलते उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं विज्ञान निकाय के छात्रों को अध्यापन के साथ ही साथ लिए व प्रायोगिक के लिए लैब की आवश्यकता भी होती है जो कि वर्तमान भवन में उपलब्ध नहीं है ऐसे में उनका प्रायोगिक कक्षाएं प्रभावित हो रही है। उरमाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मे कक्षा नौवीं से बारहवीं तक करीब 350 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। छात्रों की की संख्या ज्यादा व स्थान कम होने के चलते इन छात्रों को पढ़ाई में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भवन नहीं होने के चलते छात्र और शिक्षक परेशान
भवन नहीं होने के चलते वहां के शिक्षक व छात्र-छात्राओं काफी परेशान है। और शिक्षिका अंजना साहू (व्याख्याता) का कहना है कि स्कूल भवन जर्जर होने के चलते व छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक होने के चलते उन्हें समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। और उन्होंने कहा कि भवन को लेकर लिखित व मौखिक शिकायत भी कर चुके हैं । अब तक उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है।
कलेक्टर से भी कि शिकायत
शाला विकास समिति की अध्यक्ष देवानंद राजपूत का कहना है कि स्कूल भवन जर्जर होने की शिकायत हम जिला कलेक्टर व जिले के प्रभारी मंत्री को भी आवेदन दे चुके हैं। और उन्हें अब तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है और कई बार प्राक्कलन तैयार कर डी पी आई में भी जमा कर चुके हैं लेकिन अभी तक हमारी मांगों को लगातार अनसुना ही कर रहे हैं।
विकास खंड शिक्षा अधिकारी आर आर सिंह ने बताया कि डी पी आई को 2 बार प्राकलन बनाकर भेज चुके हैं। और अभी तक किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया शासन की ओर से नहीं आई है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी करमन खटकर से बात करना चाही तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। ना ही कोई प्रतिक्रिया जाहिर की।

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