Sunday, October 25th, 2026

 दिल्ली दंगे में जमानत देने के फैसले में UAPA के जिक्र पर SC ने उठाए सवाल

 नई दिल्ली 
दिल्ली दंगों में तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कई सवाल उठाए और कहा कि आतंकवाद रोधी कानून, यूएपीए को इस तरह से सीमित करना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसका पूरे देश में असर हो सकता है। इसके साथ न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने वाले उच्च न्यायालय के फैसले को अदालतें नजीर के तौर पर ऐसी ही राहत के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगी।

जस्टिस हेमंत गुप्ता और वी रामसुब्रमण्यम की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि हमारी परेशानी यह है कि उच्च न्यायालय ने जमानत के फैसले में पूरे यूएपीए पर विचार करते हुए ही 100 पृष्ठ लिखे हैं। शीर्ष अदालत को इसकी व्याख्या करनी होगी। कई सवाल हैं, जो इसलिए खड़े हुए कि उच्च न्यायालय में यूएपीए की वैधता को चुनौती नहीं दी गई थी। ये जमानत अर्जियां थीं, लेकिन कोर्ट ने इस कानून की वैधता पर ही निर्णय सुना दिया। न्यायालय ने इन छात्र कार्यकर्ताओं जेएनयू की नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और जामिया विवि के छात्र आसिफ इकबाल को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगे हैं। तीनों आरोपियों को जमानत देने वाले उच्च न्यायालय के फैसलों पर रोक लगाने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि किसी भी अदालत में कोई भी पक्ष इन फैसलों को मिसाल के तौर पर पेश नहीं करेगा। इस मामले पर 19 जुलाई को शुरू हो रहे हफ्ते में सुनवाई की जाएगी।

 

#SC

Source : Agency

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