Wednesday, October 21st, 2026

इजरायल के बहाने 50 देशों को साथ ला रहा रूस, अब क्या है पुतिन का प्लान

मॉस्को तेल अवीव

इजरायल और हमास के बीच जारी जंग में रूस यूं तो तटस्थ दिखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक उसका स्टैंड इजरायल के खिलाफ ही रहा है। वह लगातार गाजा पर जारी इजरायल के हमलों को बंद करने की अपील कर रहा है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र में लाए प्रस्ताव पर भी इजरायल के ही खिलाफ रहा। इस बीच वैश्विक राजनीति के जानकारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि रूस का रुख ऐसा क्यों है? दरअसल माना जा रहा है कि यूक्रेन में फंसे रूस को पश्चिमी देशों के खिलाफ एक ब्लॉक में जाने का मौका मिल गया है। रूस ने ईरान, तुर्की जैसे देशों के साथ जाकर इजरायल का विरोध किया है।

दरअसल ईरान ने यूक्रेन के खिलाफ जंग में रूस को ड्रोन और हथियार भी दिए थे। ऐसे में अब रूस भी ईरान के ही साथ दिख रहा है, जो हमास और हिजबुल्लाह का समर्थक देश माना जाता है। यही नहीं ईरान ने तो इस जंग में कूदने की भी धमकी दे दी है। रूस को लगता है कि इजरायल और हमास के बीच जारी जंग ने दुनिया को दो ध्रुवों में बांट दिया है और इसका फायदा वह यूक्रेन के मसले पर उठा सकता है। रूस ने इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह गाजा पट्टी को सीज न करे। ऐसा करना नाजी जर्मनी द्वारा दूसरे विश्व युद्ध में लेनिनग्राद को सीज करने जैसा ही होगा।

पुतिन ने तो यहां तक कहा था कि रूस इस जंग में मध्यस्थ के तौर पर काम कर सकता है। उनका कहना था कि हमारी नीयत पर कोई शक नहीं करेगा और सभी को हम पर भरोसा है। हालांकि दूसरी तरफ रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव भी पेश किया था, जिसमें नागरिकों की हत्याओं की निंदा की गई थी। लेकिन हमास का कोई जिक्र नहीं रहा। उसके इसी स्टैंड ने सवाल खड़े किए हैं। रूस के प्रस्ताव का चीन ने भी समर्थन किया था। इस तरह रूस ने इजरायल और हमास के युद्ध को अपने पक्ष में ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की है।

रूस की 50 देशों पर है नजर, चीन भी मजबूती से साथ

इस मामले में चीन, अरब देश, पाकिस्तान, बाग्लांदेश समेत बड़ी संख्या में मु्स्लिम मुल्क एकजुट हैं। ऐसे में यूक्रेन युद्ध पर किनारे लगने की स्थिति में आए रूस को लगता है कि वह एक साथ 50 से ज्यादा देशों में पैठ बना सकता है। यही वजह है कि वह भले इजरायल के बहुत खिलाफ नहीं दिख रहा है, लेकिन फिलिस्तीन की बात जरूर कर रहा है। इसे इससे भी समझ सकते हैं कि जो बाइडेन, ऋषि सुनक और ओलाफ शोल्ज जैसे नेताओं ने इजरायल का दौरा किया तो वहीं पुतिन ने पूरे 9 दिन बाद बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया।

 

Source : Agency

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