Monday, October 19th, 2026

रेमडेसिविर: डॉक्टर्स की सलाह- घबराहट में न लगवाएं इंजेक्शन

इंदौर
पूरे देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन पर मचे हाहाकार के बीच इंदौर के डॉक्टर्स ने जनता से अपील की है कि इसके प्रति जागरूक हों. चाचा नेहरू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. हेमंत जैन,  आईएमए अध्यक्ष डॉ. सतीश जोशी, अरबिंदो मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी सहित अन्य डॉक्टर्स ने मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य को लेकर कई बातें शेयर कीं.

डॉक्टर्स ने कहा कि लोग घबरा गए हैं. इस वजह से जबरदस्ती रेमडेसिविर इंजेक्शन लगवा रहे हैं. जबकि, उनको इसकी जरूरत ही नहीं है. जनरल प्रैक्टिशनर्स भी ये इंजेक्शन प्रिस्क्राइब कर रहे हैं. इसलिए गैरजरूरी इस्तेमाल के कारण इस इंजेक्शन की मांग एकदम बढ़ गई है और लोग परेशान हो रहे हैं. यदि हम इस तरह से न करें तो रेमडेसिविर के फालतू उपयोग पर 25% रोक अपने आप लग जाएगी. लोगों को समझना होगा कि हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं है.

डॉक्टर्स ने बताया कि रेमडेसिविर उस वक्त लगवाएं जब सीटी स्कैन में 10% संक्रमण दिख रहा हो, लेकिन ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से कम हो और बीमारी के लक्षण भी हों. रिपोर्ट पॉजिटिव आए तो पहले डॉक्टर को दिखाएं. मन से दवा न लें, रेमडेसिविर की जगह फेविपिराविर भी ले सकते हैं. यह भी एंटीवायरस ड्रग है. यदि रेमडेसिविर के दो डोज लग गए हों और दवा नहीं मिल रही हो तो ओरल मेडिसिन से काम चलाया जा सकता है. फेविपिराविर दी जा सकती है.

प्लाज्मा थैरेपी व रेमडेसिविर तभी कारगर है जब बीमारी के शुरुआती लक्षण सामने आने के बाद इसे दें. कम लक्षण वाले मरीज को यह नहीं दी जानी चाहिए. पॉजिटिव होने पर छह मिनट वॉक करें. यदि ऑक्सीजन सेचुरेशन में गिरावट आ जाए, तब तत्काल भर्ती होना चाहिए. यानी वॉक के पहले का सेचुरेशन और बाद के सेचुरेशन में 4% की गिरावट आ जाए तब रेमडेसिविर लगा सकते हैं.

 

#रेमडेसिविर

Source : Agency

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