Sunday, August 9th, 2026

बिहार में शराबबंदी खत्म करने की सलाह, NCAER की रिपोर्ट में राजस्व और अपराध को लेकर बड़ा दावा

पटना
राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) के एक अध्ययन के अनुसार, बिहार को शराबबंदी खत्म कर देनी चाहिए क्योंकि यह महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ने से रोकने में नाकाम रही है। इसके अलावा, ऐसे संकेत मिले हैं कि राज्य के वैध शराब की जगह नशीली दवाओं और अवैध शराब का सेवन बढ़ गया है। ‘बिहार के विकास की उपलब्धियों का व्यापक परिप्रेक्ष्य, अधूरा एजेंडा और आगे की राह’ शीर्षक वाले इस शोध पत्र में कहा गया है कि शराब उत्पाद शुल्क को फिर से लागू करने से राज्य के अपने राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत की वृद्धि होगी और प्रवर्तन तथा तस्करी-रोधी अभियानों पर होने वाले खर्च में कमी आएगी।

‘इंडिया पॉलिसी फोरम’ में प्रस्तुत इस पत्र में कहा गया कि अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू करने का मुख्य उद्देश्य यह विश्वास था कि शराब घरेलू हिंसा का एक बड़ा कारण है और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकता है। महिलाओं के समूहों ने इसका समर्थन किया था। हालांकि, पर्याप्त आंकड़ों के मूल्यांकन से पता चलता है कि बिहार में महिलाओं के खिलाफ रिपोर्ट किए गए अपराधों में कमी नहीं आई है, बल्कि शराबबंदी के बाद की अवधि में ये मामले बढ़े हैं।

प्राथमिकता वाले छह क्षेत्रों की पहचान
अध्ययन पत्र ने बिहार के विकास के लिए छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन व कानून-व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण, निजी क्षेत्र का विकास और महिला सशक्तीकरण शामिल हैं। यह पत्र राज्य के सार्वजनिक ऋण की स्थिति का आकलन करता है और मजबूत राजस्व जुटाने तथा कुशल खर्च के माध्यम से विकास पहलों को वित्तपोषित करने के रास्ते सुझाता है।

राजस्व को भारी नुकसान
शराबबंदी से पहले उत्पाद शुल्क राज्य के राजस्व का 14 प्रतिशत हिस्सा था। वहीं, शराब की तस्करी रोकने और निगरानी पर अतिरिक्त खर्च से वित्तीय घाटा और बढ़ा है। अर्थशास्त्रियों की टीम का मानना है कि अब पुराने स्तर पर उत्पाद शुल्क लागू करने का सही समय है। 1956में स्थापित एनसीएईआर देश का सबसे पुराना आर्थिक नीति अनुसंधान संस्थान है। वर्तमान में इसके शासी निकाय के चेयरमैन नंदन एम नीलकेणि हैं।

‘विकसित भारत’ में बिहार अहम
बिहार भारत की आबादी का नौ प्रतिशत से अधिक हिस्सा है और 2026 में इसकी जनसंख्या 13.2 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यहां 2005 के बाद के सुधारों में कानून-व्यवस्था की बहाली बेहद महत्वपूर्ण रही है। अध्ययन में कहा गया कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में बिहार की भूमिका अहम है, क्योंकि यह देश का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला और सबसे गरीब राज्य है।

 

#NCAER report

Source : Agency

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