राजस्थान: फिर सचिन पायलट के हिस्से आया इंतजार, गहलोत के कैबिनेट विस्तार में अभी देरी
जयपुर
राजस्थान में अशोक गहतोल कैबिनेट के विस्तार का इंतजार अभी और लंबा खिंचने वाला है। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की सोनिया गांधी से मुलाकात के बावजूद इसके आसार बेहद कम हैं। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष को प्रदेश के राजनीतिक हालात के बारे में बताया। साथ ही 2023 विधानसभा चुनावों को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत भी बताई। लेकिन हाईकमान की तरफ से इस बाबत इजाजत मिलने का इंतजार है।
प्रोफाइल तैयार, हाईकमान की हां का इंतजार
एक सूत्र के मुताबिक कैबिनेट विस्तार के लिए नेताओं की प्रोफाइल भी तैयार है। लेकिन जब तक पार्टी अध्यक्ष की इसको लेकर सहमति नहीं मिल जाती है, इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। वहीं एक कमेटी जिसमें केसी वेणुगोपाल और अजय माकन शामिल हैं, राजनीतिक नियुक्तियों और कैबिनेट विस्तार पर मंथन कर रही है। सूत्रों का कहना है कि यह दोनों इस बारे में अशोक गहलोत और सचिन पायलट से भी बातचीत कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद कैबिनेट विस्तार और नियुक्तियों का रास्ता खुल जाएगा। साथ ही सचिन पायलट की भूमिका भी तय हो जाएगी।
गहलोत ने जमाई है धाक
बता दें कि हालिया उपचुनाव में दोनों सीटें जीतने के बाद गहलोत और मजबूती के साथ उभरे हैं। उन्होंने अपनी ताकत और जीत की क्षमता दोनों का इजहार किया है। यहां पर दोनों सीटों पर भाजपा को हराने के साथ गहलोत अपने रणनीतिक कौशल की धाक हाईकमान पर जमाने में कामयाब रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस कैबिनेट विस्तार में एक नेता, एक पद की पॉलिसी पर ध्यान दे रही है। इसके चलते कैबिनेट और राजनीतिक नियुक्तियों में सभी वर्ग के जमीन से जुड़े नेताओं को तवज्जो दिया जाना है।
सचिन का फिर से सरकार बनाने पर जोर
वहीं सचिन पायलट ने हाल ही में बयान दिया था कि वह आगामी विधानसभा चुनाव जीतकर राजस्थान की परिपाटी को बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहाकि राजस्थान के चुनाव में दो साल से भी कम का वक्त रह गया है। हम इसके लिए अपने संगठन को मजबूत बनाना चाहते हैं। हमें मजबूती से लड़ना होगा और राजस्थान में एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस के ट्रेंड को बदलना होगा। सचिन पायलट ने कहाकि इसके लिए 2023 में फिर से सरकार बनाना बेहद जरूरी है। हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि दोबारा यहां कैसे जीत हासिल की जा सकती है। पार्टी इसको लेकर फैसले लेगी। इसमें अनुभव, विश्वसनीयता, क्षेत्रीय बैलेंस और जातीय समीकरण को भी ध्यान में रखा जाएगा।

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