पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का मुख्य मार्ग बारिश से पहले हो जाएगा तैयार, 88 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा
लखनऊ
उत्तर प्रदेश में लखनऊ से गाजीपुर तक बन रहे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का मुख्य मार्ग बारिश के मौसम से पहले तैयार हो जाएगा। कोरोना काल व आंशिक कर्फ्यू के बावजूद एक्सप्रेसवे का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है और अब तक 88 प्रतिशत से ज्यादा काम हो चुका है। माना जा रहा है कि जून के आखिरी हफ्ते तक पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के मुख्य मार्ग यातायात के पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इससे सीधे गाजीपुर से लखनऊ पहुंचा जा सकेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोरोना संक्रमण का खतरा टलने व स्थिति सामान्य होते ही 340.824 किमी लंबे एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे।
इस बार ज्यादा सतर्कता
असल में कोरोना संक्रमण के पहले दौरे के मुकाबले इस बार यूपीडा ने निर्माण कार्य जारी रखने के लिए पहले से तैयारियां कर ली थीं। इसलिए एक्सप्रेस के प्रोजेक्ट पैकेज प्रभारियों को मास्क, सैनेटाइजर व अन्य सामान खरीदने के लिए पहले से धन आवंटित कर दिया गया। श्रमिकों, कारीगरों व इंजीनियरो को संक्रमण से बचाने,उनकी जांच व उपचार की भी व्यवस्था की गई थी।
यूपीडा एक अधिकारी के मुताबिक पिछले साल लॉकडाउन में एक्सप्रेस का काम जारी रखने में काफी मुश्किलें आईं थीं। उसके मुकाबले इस बार काम ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ। अलबत्ता कहीं-कहीं श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता की मुश्किल सामने आई। इसके बावजूद पूर्वांचल एक्सप्रेस का निर्माण कार्य चल रहा है। यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश अवस्थी कोरोना कर्फ्यू में निर्माण कार्य की नियमित मॉनटिरिंग कर रहे हैं। निर्माण कार्य में किसी समस्या के समाधान के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर निर्माण सामग्री व मशीनों की आवाजाही सुनिश्चित की गई है। औद्योगिक विकास विभाग ने एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए जरूरी धनराशि समय से जारी कर दी है।
अमेठी से सुल्तानपुर पैकेज में सबसे ज्यादा काम
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य में अब तक रोड वर्क 89 प्रतिशत व छोटे पुल व अंडरपास का निर्माण 95.5 प्रतिशत हो चुका है। बड़े पुल, आरओबी व फ्लाईओवर का काम 90.2 प्रतिशत हो गया है। अन्य काम 66 प्रतिशत से ज्यादा हो गए हैं। 8 पैकेजों में इसमें सबसे ज्यादा काम पैकेज तीन (अमेठी से सुल्तानपुर)में 93.58 प्रतिशत हो चुका है। यूपीडा ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से आच्छादित क्षेत्रों में स्थित विभिन्न उत्पादन इकाइयों को प्रदेश की राजधानी एवं राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने के लिए एक औद्योगिक कारिडोर के रूप में सहायक होगा।

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