Friday, October 23rd, 2026

संपन्न किसानों ने बढ़ाया रकबा, किसानों के खेतों में जुड़ी 50 हजार हेक्टेयर जमीन

भोपाल
प्रदेश के साढ़े तीन हजार किसान ऐसे हैं जो गेहूं और धान के उपार्जन के लिए राज्य सरकार द्वारा तय की गई अधिकतम 11 हेक्टेयर से अधिक भूमि के स्वामी हैं। इन किसानों के पास सरकार को करीब पचास हजार हेक्टेयर भूमि होने की जानकारी मिली है। इन किसानों की 11 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर हुई खेती की उपज खरीदने से सरकार ने इनकार कर दिए हैं। साथ ही इसकी जांच के लिए उपार्जन करने वाले खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि इनके भूमि के बारे में वास्तविक जानकारी जुटाई जाए ताकि सरकार इस बारे में निर्णय ले सके।

11 हेक्टेयर से अधिक सिंचित और असिंचित भूमि के मालिकों में सबसे अधिक 341 सागर जिले में हैं। इसके बाद रायसेन जिले में 254, अशोकनगर जिले में 209 किसान चिन्हित किए गए हैं। 11 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती कर उपार्जन के लिए सरकार के  पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या सभी 52 जिलों में है और यह सबसे कम निवाड़ी में एक, अलीराजपुर और झाबुआ में दो-दो, अनूपपुर में तीन और बड़वानी में चार है।

इन जिलों में महंगी जमीन के मालिक हैं किसान
11 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करने वाले जिन किसानों के नाम सामने आए हैं, उनमें सिंचित भूमि 42929 हेक्टेयर है जबकि असिंचित भूमि 6733 हेक्टेयर है। तय लिमिट से अधिक भूमि पर खेती करने वाले किसानों की सागर जिले में सिंचित भूमि सबसे अधिक 3956 हेक्टेयर है। यह जिला असिंचित भूमि के मामले में भी 778.21 हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है। अशोकनगर, रायसेन, विदिशा, सतना, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, पन्ना और दमोह जिलों में 11 हेक्टेयर से अधिक असिंचित भूमि वाले किसानों के पास 3 हजार, 2702, 2178, 1730, 1561, 1526, 1458 1361, 1340 हेक्टेयर सिंचित जमीन होने की जानकारी मिली है।

सीलिंग एक्ट में था अधिकतम 18 एकड़ जमीन रखने का प्रावधान
मध्यप्रदेश कृषि जोत उच्चतम सीमा अधिनियम 1960 (सीलिंग एक्ट) में प्रावधान किया गया था कि कोई भी व्यक्ति बहु फसलीय अधिकतम 18 एकड़ जमीन ही रख सकता था। इस सीमा से अधिक जमीन सरकार ने ले ली थी। दो फसली खेत के लिए यह सीमा 32 एकड़ है। हालांकि यह एक्ट दो दशक पहले समाप्त घोषित हो चुका है लेकिन सरकार जांच के जरिये यह पता करने की कोशिश में है कि सीलिंग एक्ट खत्म होने के बाद इतनी अधिक जमीन की खरीद फरोख्त ढाई दशक में किन हालातों में हुई है। जांच के बाद इस मामले में कोई नीतिगत निर्णय भी सरकार ले सकती है।

 

Source : Agency

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