व्हाट्सऐप ग्रुप में किया एड और चले गए लगभग 2 करोड़ रुपये
नई दिल्ली
ऑनलाइन स्कैम का चलन बढ़ता जा रहा है। आए दिन साइबर फ्रॉड के मामले सामने आते रहते हैं। लोगों को पता भी नहीं चलता है और उनके साथ लाखों की ठगी हो जाती है। हाल ही में एक नया मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाट्सऐप के जरिए एक नया स्कैम हो रहा है। आंध्र प्रदेश के रिटायर्ड प्रोफेसर ने व्हाट्सऐप ग्रुप को ज्वाइन करके अपने लगभग दो करोड़ रुपये गवा दिए। जी हां, अगर आप भी व्हाट्सऐप का यूज करते हैं तो सावधान रहें। सिर्फ एक ग्रुप में जुड़ने से अपना बैंक अकाउंट खाली कर सकता है। आइये, इस पूरा मामला डिटेल में जानते हैं।
इस ग्रुप में जुड़ने से हुई ठगी
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में Dr. M. Batmanabane Mounissamy के साथ ठगी हुई है, जो जेआईपीएमईआर, पांडिचेरी के पूर्व निदेशक और प्रोफेसर हैं। 18 जून को प्रोफेसर ने अपने साथ हुए साइबर फ्रॉड के बारे में शिकायत दर्ज कराई। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उन्हें एक ग्रुप में जोड़ा गया है। इसक ग्रुप का नाम एच-10 नुवामा है, जो कि एक हेल्थ ग्रुप है। ग्रुप के एडमिन ने नुवामा फंड्स में निवेश करने के बारे में अंदरूनी जानकारी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन देने का वादा किया था। इसे पहले एडलवाइस के नाम से जाना जाता था।
स्कैमर्स ने ऐसे जीता भरोसा
प्रोफेसर पहले से ही कंपनी से परिचित थे और मूल नुवामा फंड्स में उनके निवेश थे, इसलिए उन्होंने मान लिया कि ग्रुप वास्तव में फर्म से संबंधित है। उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया। इसके तुरंत बाद कंगना नाम की एक लड़की ने प्राइवेट चैट के ज़रिए उनसे कॉन्टैक्ट किया और दावा किया कि वह नुवामा की प्रतिनिधि है। उसने प्रोफेसर को नुवामा फंड्स नाम की एक वेबसाइट पर रजिस्टर करने के लिए कहा। यह वेबसाइठ असली ब्रांडिंग की नकल करने वाली फर्जी वेबसाइट थी। प्रोफेसर ने शुरुआत में 19 अप्रैल को 10,000 रुपये का निवेश किया और उन्हें जल्द ही 13,000 रुपये का रिटर्न मिला गया। इस छोटे से लाभ के कारण ग्रुप पर उनका भरोसा बढ़ गया है।
किया करोड़ों का निवेश
इसके बाद अगले 5 हफ्तों में प्रोफेसर ने कुल 1.9 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो उनके अनुसार हाई परफॉर्मेंस वाले स्टॉक पोर्टफोलियो थे। मई के अंत तक, नकली प्लेटफॉर्म ने 35 करोड़ रुपये का अकाउंट शेष दिखाया। जब उन्होंने 5 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की तो घोटालेबाजों ने प्रोसेसिंग फीस मांगी। शुरुआत में, उन्होंने 32 लाख रुपये मांगे, लेकिन बाद में मांग को घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया। अपनी कमाई का कम से कम हिस्सा वापस पाने की उम्मीद में प्रोफेसर ने 7.9 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
अधिकारी से संपर्क करने के बाद भी नहीं बना काम
इतने पैसे देने के बाद भी उनके पैसे नहीं निकल पाए। प्रोफेसर ने घोटालेबाजों से फिर से संपर्क किया और उन्हें एक अन्य व्यक्ति से मिलवाया गया। इसका नाम आशीष केहैर बताया गया है, जो कि एक वरिष्ठ अधिकारी था। हालांकि, इसके बाद भी कोई पैसा वापस नहीं किया गया। इसके बाद प्रोसेसर को समझ आ गया है कि उनके साथ फ्रॉड हुआ है। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया है। इस तरह से स्कैम के मामले बढ़ते जा रहे हैं और लोगों को इससे बचना चाहिए।

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