राजनेता और जनप्रतिनिधि अमर्यादित एवं भड़काऊ कथन से परहेज करें : रिजवी
रायपुर
देश में कुछ साम्प्रदायिक सोच रखने वाले जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से अपने बयानों द्वारा देश के सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को जानबूझकर वर्ग विशेष के धर्म या धार्मिक विश्वासों को अपमानित करने की मंशा के तहत आजकल कुछ ज्यादा ही बढ़-चढ़ कर जहर उगल रहे हैं। यह कृत्य देश की एकता, अखण्डता एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को सोची समझी साजिश के तहत नष्ट करने का कुप्रयास है। इससे देश को खंडित एवं पुन: विभाजित करने की ओछी मानसिकता परिलक्षित होती है जो किसी षड?ंत्र की ओर इंगित करता है।
मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष तथा वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा भड़काऊ कथन देश हित के विपरीत है तथा धर्म विशेष के लोगों को उद्वेलित एवं उत्तेजित करने का प्रयास है। भड़काऊ, उत्तेजक एवं विस्फोटक बयान देने वालों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत तत्काल गिरफ्तार कर दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 295 (ए) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध करना राष्ट्रहित में होगा तथा दोषी पाए जाने पर जनप्रतिनिधि को तत्काल पदमुक्त किए जाने का प्रावधान किया जाए। इस प्रक्रिया से बड़बोले उन्माद फैलाने वाले तथाकथित नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों पर लगाम कसी जा सकती है तथा उन्हें चुनाव लड?े से अपात्र घोषित किये जाने का कानून बनाना वक्त का तकाजा है।
रिजवी ने कहा है कि इस दिशा में तत्काल पहल एवं कड़ी कार्यवाही देशहित में होगी और देश के संविधान के अनुरूप सभी धर्मावलम्बियों के धार्मिक विश्वासों एवं सम्मान की सभी वर्ग कदर करेंगे। देश का सेक्यूलर स्वरूप बरकरार रहेगा। इस प्रतिबद्धता की आज देश को आवश्यकता है। उक्त आशय का ईमेल पत्र महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय सीजेआई, माननीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग को समुचित कार्यवाही हेतु प्रेषित किया है।

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