Wednesday, October 21st, 2026

हिजाब पहनने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल

बेंगलुरु। कर्नाटक के उडुपी के सरकारी पीयू महिला कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब का मामला हाई कोर्ट में है। हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की है। राज्य में हिजाब और भगवा शॉल पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अदालत ने कहा है कि भावनाओं और जुनून से नहीं कानून और संविधान से देश चलेगा। हिजाब विवाद की सुनवाई छह छात्राओं की ओर से दायर की गई याचिका पर हो रही है। आइए जानते हैं आज की सुनवाई में क्या हुआ..

हम कानून और संविधान के मुताबिक चलेंगे: हाई कोर्ट
कर्नाटक हाई कोर्ट में सुबह साढ़े दस बजे के बाद सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कहा कि हम तर्क और कानून से चलेंगे न कि भावनाओं और जुनून से। देश के संविधान में जो व्यवस्था दी गई है, हम उसके मुताबिक चलेंगे। कर्नाटक सरकार के एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि यूनिफॉर्म के बारे में फैसला लेने की स्वतंत्रता छात्रों को दी गई है। जो स्टूडेंट इसमें छूट चाहते हैं उन्हें कॉलेज की डेवलपमेंट कमिटी के पास जाना चाहिए।

छात्राओं की तरफ से पैरवी में वकील ने कुरान का किया जिक्र
हिजाब पहनने के अधिकार की मांग कर रहीं छात्राओं की ओर से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने कोर्ट में पैरवी की। उन्होंने कहा, 'पांच फरवरी 2022 को राज्य सरकार ने जो नोटिफिकेशन जारी किया है, वह तीन हाई कोर्ट के तीन फैसलों पर आधारित है। लेकिन ये मामले हिजाब से जुड़े नहीं थे। पवित्र कुरान में हिजाब पहनने को आवश्यक धार्मिक परंपरा बताया गया है।'

संविधान के अनुच्छेद 21 का दिया हवाला
छात्राओं की तरफ से पैरवी करते हुए कामत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुट्टास्वामी जजमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि हिजाब पहनना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार में आता है।

क्लास के भीतर हिजाब पहनने का अधिकार देने की मांग
एक छात्रा की ओर से कर्नाटक हाई कोर्ट में यह रिट याचिका दायर की गई थी। छात्रा ने रिट में कक्षा के भीतर हिजाब पहनने का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया है। छात्रा रेशम फारूक की रिट याचिका का प्रतिनिधित्व उनके भाई मुबारक फारूक कर रहे हैं। इस बीच हाई कोर्ट में सुनवाई से पहले उडुपी के महात्मा गांधी मेमोरियल कॉलेज में हिजाब और भगवा शॉल पहने स्टूडेंट्स आमने-सामने हो गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने कहा है कि छात्राओं को हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत दिया गया मौलिक अधिकार है और इस्लाम के तहत यह एक आवश्यक प्रथा है।

बताया मौलिक अधिकार
याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया कि उसे और उसकी अन्य सहपाठियों को कॉलेज प्रशासन के हस्तक्षेप के बिना हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। कॉलेज ने इस्लाम धर्म का पालन करने वाली आठ छात्राओं को प्रवेश नहीं करने दिया। इसमें कहा गया है कि ये छात्राएं हिजाब पहने थीं, इसलिए उन्हें शिक्षा के उनके मौलिक अधिकार से वंचित किया गया।

 

Source : Agency

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