नहीं दी नए निर्माण की अनुमतियां, स्कूल शिक्षा विभाग ने मांगी रिपोर्ट
भोपाल
प्रदेश के सभी जिलों में शिक्षा विभाग के कामों के लिए दिए गए बजट से बची स्पिलओवर की राशियां इस साल भी खर्च नहीं किए जाने पर केन्द्र ने नाराजगी जताई है। इसके चलते इस वित्तीय वर्ष में नवीन निर्माण कार्यो को भी स्वीकृति नहीं दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों से स्पिलओवर की राशि की समीक्षा कर जानकारी भेजने को कहा है।
स्कूल शिक्षा विभाग को केन्द्रीय बजट से हर साल अतिरिक्त कक्ष, बालक-बालिका शौचालय, शाला भवन, विद्युतीकरण, मरम्मत, हैंडवाश यूनिट, विद्युतीकरण, जीर्णशीर्ण माध्यमिक और प्राथमिक शाला भवन, छात्रावास, मम्मत कार्य के लिए राशि दी जाती है। इसमें जो स्वीकृत राशि बच जाती है उसे स्पिलओवर माना जाता है। प्रदेश के जिलों के लिए पिछले साल स्वीकृत काफी राशि खर्च नहीं हो पाई है। कोरोना के चलते काम ही नहीं हुए और स्पिलओवर की राशि खर्च नहीं हो पाई। लाखों रुपए अभी भी जिलों ने खर्च ही नहीं किए। इसको लेकर केन्द्र सरकार ने नाराजगी जताई है। केन्द्र ने इस साल नये कामों के लिए वित्तीय स्वीकृति देने से भी इंकार कर दिया है।
केन्द्र का कहना है कि पहले स्पिलओवर की राशि मध्यप्रदेश सरकार खर्च करे तब उसे नया बजट दिया जाएगा। केन्द्र के फरमान के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर पूछा है कि इस वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से अभी तक कितनी राशि स्पिलओवर में से खर्च हो पाई है। उसका ब्यौरा दे और पूरी राशि खर्च करे।
इसके बाद ही कोई नया बजट स्वीकृत किया जाएगा। सभी से दिसंबर 2021 तक स्पिलओवर बजट खर्च करने की नई कार्ययोजना भी मांगी गई है। इसमें सितंबर से दिसंबर तक कितने काम कितनी राशि खर्च कर पूरे किए जाएंगे इसका पूरा ब्यौरा कलेक्टरों से मांगा गया है।
प्रदेश के कई जिलों में स्पिलओवर की काफी राशि बची हुई है। प्रदेशभर में कुल सिविल वर्क में ही 254 करोड़ 3 लाख रुपए की राशि खर्च नहीं हो पाई है। राशि खर्च नहीं करने वाले जिलों में उनमें सिविल वर्क में सर्वाधिक राशि गुना जिले में 1665 लाख 64 हजार, विदिशा में 1411 लाख 7 हजार, सिवनी में 1114 लाख 34 हजार, सतना में 1083 लाख 43 हजार रुपए राशि बची हुई है।
अतिरिक्त कक्ष, बिजली कार्य, फर्नीचर काम,शौचालय, मरम्मत के अलग-अलग जिलों में काफी राशि खर्च नहीं हो पाई है। इन सभी का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।

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