Wednesday, October 21st, 2026

बांग्लादेश में अब मुजीबुर्रहमान की विरासत पर विवाद, मूर्ति व चित्रों को नुकसान पर दो धड़ों में बंटे लोग

ढाका.

बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद और देश छोड़ना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन के बीच बांग्लादेश में काफी उथल-पुथल रही। वहीं देश में अब बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को बचाए रखने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। हालात यह हैं कि जिन्होंने बांग्लादेश को आजादी दिलाई,आज उसी देश में उनकी प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है।

दीवारों पर बने चित्रों पर कालिख पोती जा रही है। इसे लेकर बांग्लादेश के लोग दो धड़ों में बंट गए हैं। एक धड़ा ऐसा है जो राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियों और चित्रों के साथ हो रही छेड़छाड़ का विरोध कर रहा है। वहीं दूसरा धड़ा इसका समर्थन कर रहा है। लोगों का कहना है कि बांग्लादेश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा और राष्ट्रपिता का ऐसा अपमान ठीक नहीं है। बांग्लादेश में सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन और हिंसा के बीच पांच अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देने के बाद देश छोड़ना पड़ा। आंदोलनकारियों ने अपने गुस्से की आग में बंग बंधु और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को खूब तहस नहस किया। प्रदर्शनकारियों ने ढाका में लगी रहमान की विशाल प्रतिमा को गिरा दिया। वहीं धनमंडी में उनके घर, जिसे बाद में स्मारक में बदल दिया गया था, उसे तक क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके अलावा ढाका विवि के प्रसिद्ध शिक्षक छात्र केंद्र (टीएससी) की इमारत के सामने की ओर दीवार पर बने मोजेक पैनल, जो ढाका में पाकिस्तानी सेनाओं के आत्मसमर्पण की कहानी बयां करते हैं, उसमें रहमान के पैनल को खराब कर दिया गया। उसका चेहरा काला कर दिया गया। वहीं विवि परिसर की दीवार पर बने शेख मुजीबुर्रहमान और शेख हसीना के चित्रों पर कालिख पोत दी गई। वहीं टीएसी के सामने बने राजू मेमोरियल और सुहरावर्दी उद्यान के सामने बने राष्ट्रीय स्मारक जहां से शेख मुजीबुर्रहमान ने सात मार्च 1971 को ऐतिहासिक भाषण दिया था, उसे भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

ढाका मेट्रो के खंभों पर बने रहमान और हसीना के विशाल चित्रों को भी काला कर दिया। इसे लेकर बांग्लादेशियों के एक वर्ग में काफी डर है। ढाका विवि एक छात्र का कहना है कि यह बिल्कुल गलत था। उन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। वह राष्ट्रपिता हैं। हमारे बंगबंधु हैं। वह गुस्से में इतने अपमानित कैसे हो सकते हैं। उनको डर है कि मुजीब की विरासत को धीरे-धीरे मिटाया जा सकता है।

 

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Source : Agency

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