छतरपुर बस स्टैंड पर अब बनेगा पांच मंजिला कॉम्पलेक्स
छतरपुर
बस स्टैंड के पास नगरपालिका की सराय कॉम्पलेक्स बनाने के लिए तोड़ दी गई। लेकिन कॉम्पलेक्स का निर्माण नहीं हो सका। कानूनी अड़चनों एवं तकनीकी समस्याओं के चलते अधूरे पड़े इस निर्माण कार्य को अब नए सिरे से किए जाने के निर्देश जारी हुए हैं। पिछले माह छतरपुर विधायक आलोक चतुर्वेदी के द्वारा विधानसभा में इस अधूरे निर्माण कार्य के संबंध में प्रश्न उठाया गया था, जिसके बाद नगरीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने नगर पालिका छतरपुर को निर्देशित किया है कि इस कॉम्पलेक्स का निर्माण नए सिरे से किया जाए। इस निर्माण कार्य के 9 साल से अधूरे पड़े होने के कारण एक ओर जहां पुरानी सरायं के तोड़े जाने से बेघर हुए 23 दुकानदार ठोकरें खा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ शहर में सराय का अभाव भी है।
बनेगा नया नक्शा, नया प्रस्ताव
नगर पालिका से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रमुख सचिव द्वारा सराय की फाइल अपने पास मंगाए जाने के बाद इस दिशा में गति आ सकती है। नगर पालिका अब बस स्टैंड के इस सराय क्षेत्र पर कॉम्पलेक्स निर्माण के लिए एक नया नक्शा एवं नया प्रस्ताव लाएगी। इस नक्शे को नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद एनएच की अनुमति दिलाई जाएगी। उसके बाद नए सिरे से निर्माण का टेंडर जारी होगा और फिर इस कॉम्पलेक्स का निर्माण हो सकेगा।
तीन साल चली कवायद फिर ठंडे बस्ते में गई
नगर पालिका के द्वारा वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह निर्माण कार्य कई तकनीकी खामियों के चलते न सिर्फ अधर में लटक गया बल्कि इससे लाखों रूपए की बर्बाद भी हुई। नगर पालिका ने इस निर्माण कार्य को बगैर सक्षम अनुमतियों के टेंडर जारी कर शुरू कराया था जिसके चलते शिकायतकर्ताओं ने इस निर्माण कार्य को बंद करा दिया। जब यह निर्माण कार्य 2013 में बंद हुआ तब तक प्लॉट क्षेत्र में लेंटर डाला जा चुका था जिस पर लाखों रूपए खर्च हुए थे। इतना ही नहीं यहां मौजूद 23 पुरानी दुकानों को तोड़ दिया गया था। ये दुकानदार तब से अब तक अपने लिए नई दुकान नहीं हासिल कर पाए हैं। इन दुकानदारों के द्वारा इसी जमीन पर टीन के डिब्बे रखकर व्यवसाय किया जा रहा है जिससे उनके परिवार भी बुरी तरह प्रभावित हुए। दुकानदारों ने जब इस मुद्दे को हाईकोर्ट में उठाया तो कोर्ट ने भी वर्ष 2017 में नगर पालिका को निर्देशित किया था कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर दुकानदारों को दुकानें उपलब्ध कराई जाएं लेकिन यह निर्माण कार्य ही पूरा नहीं हो सका।

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