अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया में नया सैन्य समझौता
दिल्ली
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने एक नया समझौता किया है जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बी बनाने की तकनीक मिलेगी. अपने पड़ोस में हुए इस समझौते को चीन ने "शीत युद्ध वाली सोच" बताया है.अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और युनाइटेड किंग्डम ने मिलकर एक नया रक्षा समूह बनाया है जो विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित होगा. इस समूह के समझौते के तहत अमेरिका और ब्रिटेन अपनी परमाणु शक्तिसंपन्न पनडुब्बियों की तकनीक ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा करेंगे. इस कदम को क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बरअक्स देखा जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ ऑनलाइन बैठक की. बैठक के बाद तीनों नेताओं ने नए गठबंधन का ऐलान एक वीडियो के जरिए किया.
तालिबान के लिए छूटे अमेरिकी हथियार इस गठबंधन में शामिल तीनों देश साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पानी के नीचे की क्षमताओं समेत अपनी तमान सैन्य क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए एक दूसरे से तकनीक साझा करेंगे. यह गठबंधन इसलिए अहम माना जा रहा है कि चीन के अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही के साथ संबंध लगातार खराब हो रहे हैं. ‘ऐतिहासिक समझौता' वीडियो लिंक के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने बैठक के दौरान कहा, "आज हम एक और ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं और तीनों देशों के सहयोग को औपचारिक करते हुए और गहरा कर रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हम सभी हिंद प्रशांत क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बने रहने की अहमियत समझते हैं" ये तीनों देश पहले से ही फाइव आइज नाम के उस गठबंधन का हिस्सा हैं जिसमें कनाडा और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं और एक दूसरे से खुफिया सूचनाएं साझा करते हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि तीनों साझीदार एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं. जॉनसन ने कहा, "हम अपनी मित्रता का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं और पहला काम है ऑस्ट्रेलिया को परमाणु शक्ति संपन्न पनडुब्बियां उपलब्ध कराना" जॉनसन ने इस बात पर जोर दिया कि ऑस्ट्रेलिया को उपलब्ध कराए जाने वाली पनडुब्बी में परमाणु रिएक्टर होंगे ना कि परमाणु हथियार.

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