बिहार में नक्सलियों पर कसा शिकंजा, चकरबंधा में उखड़े पांव, टूटा चक्रव्यूह
पटना
बिहार के गया-औरंगाबाद और झारखंड के पलामू से लगा चकरबंधा अब नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा। सुरक्षाबलों ने चकरबंधा के अभेद्य चक्रव्यूह को तोड़ दिया है। कभी नक्सलियों का यहां साम्राज्य होता था और बड़े कमांडर भी चकरबंधा में खुद को सुरक्षित महसूस करते थे। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। पूरे इलाके को सुरक्षाबलों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।
35 लम्बा और 16 किलोमीटर चौड़ा है यह इलाका
चकरबंधा तक पहुंचना अर्द्धसैनिक बलों या पुलिस के लिए कभी भी आसान नहीं रहा। जंगल और पहाड़ वाला यह इलाका 35 किलोमीटर लम्बा और 15-16 किलोमीटर चौड़ा है। घने जंगल और ऊंचाई का फायदा उठाकर नक्सली यहां वर्षों तक काबिज रहे। धीरे-धीरे ही सही, पर नक्सलियों के पांव यहां से भी उखड़ गए हैं। पहले की तरह नक्सलियों के लिए चकरबंधा सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा। यहां तक की अब इस इलाके में उनकी उपस्थिति भी न के बरारब रह गई है।
जंगल के बीच तरी और लंगुराही कैंप ने बदली स्थिति
हाल में ही चकरबंधा के पहाड़ी इलाके में सीआरपीएफ के दो नए कैंप खोले गए हैं। औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र में तरी और लंगुराही में बने कैंप ने सुरक्षाबलों की स्थिति काफी मजबूत कर दी है। तरी का कैंप लंगुराही से 3 किलोमीटर नीचे की तरफ है। इन दो नए कैंप के खुलने के पहले यहां से 10 किलोमीटर की दूरी पर विश्रामपुर कैंप से इलाके को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता था। तरी और लंगुराही में सीआरपीएफ की मौजूदगी के बाद हालात और भी तेजी से बदले हैं।

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