Thursday, October 22nd, 2026

पुलिस की नौकरी छोड़ने की शर्त पर अपहृत जवान को नक्सलियों ने किया रिहा

बीजापुर

नक्सलियों ने बस्तर फाइटर के अपह्रित जवान शंकर कुडिरम को रिहा कर दिया है। नक्सलियों के जनअदालत में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के सामने शुक्रवार रात्रि 08 बजे पुलिस की नौकरी छोड़ने की शर्त पर रिहा कर दिया है। अपह्रित जवान शंकर ने बताया कि वह अपने मित्र को लेने ग्राम उसपरी गया था, इस दौरान गांव के बाहर नक्सलियों कि मौजूदगी थी। नक्सलियों को जब जानकारी मिली कि बस्तर फाइटर का एक जवान गांव में घूम रहा हैं तो उन्होंने उसे पकड़ लिया और लगातार उससे पूछताछ की जाती रही है। अपह्रित जवान शंकर बताता है कि दिन में उसे किसी घर में रखा जाता था और उसे वहां भोजन पानी भी नियमित रूप से दिया जाता था। जब भी नक्सली कहीं आते जाते थे तो उसे भी साथ ले जाते थे। इस दौरान अलग - अलग नक्सलियों के साथ वह रहता था, लेकिन न तो उससे मारपीट की गई और न ही प्रताड़ना दी गई।

नक्सलियों के डीवीसी सदस्य सुखलाल ने जनअदालत के दौरान लोगों को बताया कि शंकर पुलिस का जवान था इसलिए ग्रामीणों ने उसे मार डालने कहा था, लेकिन समाज और परिजनों की अपील के कारण एक बार फिर उससे पूछताछ की और फिर समाज और परिजनों से पूछ-ताछ के बाद लोगों से चर्चा कर पूर्व के निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए शंकर कुडियम को कुछ शर्तों पर छोड़ने का निर्णय लिया गया।

उल्लेखनिय है कि अपह्रित जवान शंकर बीजापुर के एरमनार गांव का आदिवासी युवक है, जो कुछ वर्ष पहले ही पुलिस बल में भर्ती हुआ था। वहीं दूसरी ओर जिन्होंने जनअदालत लगाई थी, वे भी आदिवासी थे, पर नक्सलियों के साथ खड़े हैं। नक्सलवाद से बस्तर को क्या मिला है, यह दृश्य बता रहा था, क्योंकि एक पक्ष के साथ खड़े आदिवासी, दूसरे पक्ष के आदिवासी को जान से मारने उतारु हैं। इस जनअदालत में शंकर की ओर से पैरवी करने कुछ सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार वहां पहुंचे थे, जो उसे सुरक्षित ले जाने आए हुए थे, पर अंतिम निर्णय यहां नक्सलियों को ही सुनाना था।

एक नक्सली ने आरोप पढ़ा कि सुरक्षा बल ग्रामीणों पर अत्याचार करते हैं और शंकर भी उन्हीं में से एक है इसलिए उसे मौत की सजा देनी चाहिए। शंकर ने अपना पक्ष रखा कि वह परिवार के लालन-पोषण के लिए सुरक्षा बल में नियुक्त हुआ है। अनुनय-विनय के बाद शंकर ने कहा कि वह अब सुरक्षा बल की नौकरी छोड़कर गांव लौट जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकारों ने भी शंकर को छोड?े की नक्सलियों से अपील की। आखिरकार नक्सलियों ने निर्णय शंकर के पक्ष में सुनाया गया और उसे छोड़ दिया गया। एक सप्ताह तक नक्सलियों की कैद में बिताने के बाद अब शंकर को छोड़ दिया गया।

शंकर कुडिरम को नक्सलियों की माड़ डिविजन ने 29 सितंबर को उसपरी घाट से अगवा कर लिया था, जहां वह अपने परिचित को छोड़ने गया हुआ था। गुरुवार को माड़ डिविजन कमेटी की सचिव अनिता मंडावी ने पर्चा जारी कर इसकी सूचना देते हुए जनअदालत लगाने की बात कही थी। एसपी बीजापुर आंजनेय वार्ष्णेय ने भी परिवार और सामाजिक कार्यकतार्ओं की अपील पर नक्सलियों से उसे रिहा करने की अपेक्षा की थी।

 

Source : Agency

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