Friday, October 23rd, 2026

चैत्र नवरात्रि का संगीतमय शुभारंभ, मंदिर में गूंजे विदुषी सुलेखा के भजन

( अमिताभ पाण्डेय )
भोपाल

चैत्र नवरात्रि के पहले दिवस का शुभारंभ भोपाल में परंपरागत श्रद्धा भाव से हुआ । इस अवसर पर घरों और देवी मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई ।   भोपाल के नेहरूनगर स्थित करुणाधाम आश्रम स्थित मंदिर में शाम को विदुषी सुलेखा भट्ट ने देवी की महिमा का गायन संगीतमय भजनों से किया। भजन गंगा में लगभग दो घंटे श्रद्धालु ऐसे झूमे कि पूरा वातावरण भक्तिरस से भर गया।

जैसा कि आप जानते हैं संगीत की दुनिया में  ग्वालियर घराने का नाम बहुत आदर सम्मान से लिया जाता है। यहां से संगीत की शिक्षा पाने वाले अनेक गायकों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत का नाम दुनिया में रोशन किया है।  विख्यात गायिका सुलेखा भट्ट भी इसी घराने से जुड़कर नियमित संगीत साधना के कारण प्रतिष्ठत कला साधिका के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।  उनकी संगीत प्रस्तुति देश में विभिन्न राज्यों के महानगरों में हो चुकी है । इन प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने सराहा और प्रशंसा की है। करुणाधाम आश्रम के मंदिर परिसर में भी संगीतमय भजन  संध्या की शुरुवात विदुषी सुलेखा ने  राग मधुवंती पर आधारित  देवी रचना  " जय कालिके कलात्मिके " से की।   इसके बाद उन्होंने भक्ति रस में डूबे एक से एक बढ़कर  भजन सुनाकर श्रोताओं को भी  अपने साथ  गाने , गुनगुनाने के लिए जोड़ लिया। श्रोता मंत्रमुग्ध होकर विदुषी सुलेखा के भजनों में  संगीत की सुरलहरियों   के साथ अपनी - अपनी आवाज भी मिलाते रहे । विदुषी सुलेखा ने  अपने पारंपरिक भजन  " नाम प्रभु का है हितकारी "  से प्रभु की महिमा का बखान किया ।

इसके पश्चात श्री कृष्ण के प्रेम में व्याकुल मीराबाई के भजन  " म्हारे घर आओ जो जी "  प्रस्तुत किया ।  निर्गुणी कबीर भजन " मन लागो मेरो यार फकीरी में " के माध्यम से शरीर की नश्वरता और रामचरण में जाने का बखूबी वर्णन किया ।  भक्तिभाव  की इस संगीत में यात्रा में विदुषी सुलेखा ने दक्षिण भारतीय संगीत का  लोकप्रिय कन्नड़ लक्ष्मी भजन  " भाग्यदा लक्ष्मी बारम्बा "  भी सुनाया । लक्ष्मी मैया की वंदना पर केंद्रित इस भजन का श्रोताओं ने गाते और  ताली बजाते हुए आनंद लिया ।  इसके बाद एक और निर्गुणी भजन " शून्य गढ़ शहर "  का गायन मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। फिर तो  भजन के लिए  श्रोताओं की  फरमाइश का  सिलसिला शुरू हो गया । विदुषी सुलेखा ने एक मराठी भजन "  रूप पाहता लोचिनी "  गाया । उन्होंने  राग भैरवी पर आधारित  भजन "  आन पड़ी रे मझधार " से संगीतमय  कार्यक्रम का समापन किया ।  यहां यह बताना जरुरी होगा कि विदुषी सुलेखा भट्ट देश की विख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका हैं जिन्होंने अनेक प्रतिष्ठित मंच पर अपने गायन से ग्वालियर घराने का नाम रोशन किया है । उन्होंने सुप्रसिद्ध संगीत शिरोमणि  वीणा सहस्त्रबुद्धे के सानिध्य में संगीत साधना की है।  

 जाने - माने  संगीतकार ए आर रहमान की चेन्नई स्थित के  एम म्यूजिक कंजरवेट्री  में विदुषी सुलेखा भट्ट को अपनी गायन प्रतिभा के प्रदर्शन हेतु आमंत्रित किया गया।  उनका वहां श्री रहमान ने सम्मान किया ।  करुणाधाम  आश्रम के मंदिर परिसर में हुई भजन संध्या में  विदुषी सुलेखा भट्ट के साथ तबले पर युवा तबला वादक शशांक मिश्रा और हारमोनियम पर जीतेंद्र शर्माने संगत की । सुर - ताल के इस संगम में भजनों की धुन पर श्रोता झूमते , गाते रहे ।  कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी भोपाल के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी राजेश भट्ट ने किया । इस अवसर पर करुणाधाम आश्रम के  पीठाधीश्वर  गुरुदेव सुदेश शांडिल्य ,  भक्त  शिरोमणि स्वप्निल जोशी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मप्रेमी उपस्थित थे। यह  संगीतमय शाम  भक्तजनों के लिए यादगार बन गई। ऐसे संगीतमय आयोजन का श्रोताओं को आगे भी इंतजार रहेगा।

 

Source : Agency

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